Summer express, पलवल , सुंदर कुंडू | पलवल जिला परिषद में विकास कार्यों के बजट को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर और हरियाणा के खेल राज्यमंत्री गौरव गौतम की पहल पर आयोजित बैठक में जिला परिषद के सभी सदस्यों के बीच सहमति बनी कि अब परिषद के सभी वार्डों में विकास कार्यों के लिए समान रूप से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। इस फैसले के बाद लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है।
पलवल लघु सचिवालय के सभागार में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर, खेल राज्यमंत्री गौरव गौतम, होडल विधायक हरेंद्र रामरतन, पृथला से कांग्रेस विधायक रघुवीर सिंह तेवतिया, उपायुक्त डॉ. जयेंद्र सिंह छिल्लर, जिला परिषद के अधिकारी तथा सभी जिला पार्षद मौजूद रहे। बैठक में विकास कार्यों के लिए बजट वितरण को लेकर दोनों पक्षों की शिकायतों और आपत्तियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
गौरतलब है कि जिला परिषद में लंबे समय से दो गुट आमने-सामने थे। चेयरमैन पक्ष कुछ अधिकारियों और पार्षदों पर मिलीभगत के आरोप लगा रहा था, जबकि दूसरा पक्ष चेयरमैन पर विकास निधि का समान वितरण नहीं करने का आरोप लगा रहा था। इसी विवाद के चलते कई वार्डों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे और लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं।
बैठक के बाद केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि कई पार्षदों की ओर से यह शिकायत मिल रही थी कि उनके वार्डों को विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं मिल रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी पक्षों को एक साथ बैठाकर समाधान निकाला गया है। उन्होंने कहा कि अब परिषद के प्रत्येक सदस्य को विकास कार्यों के लिए समान अवसर और समान धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि सभी वार्डों में बिना किसी भेदभाव के विकास सुनिश्चित हो सके।
खेल राज्यमंत्री गौरव गौतम ने भी कहा कि जिला परिषद के सदस्यों के बीच विकास कार्यों को लेकर जो मतभेद थे, उन्हें समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी वार्ड के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा और विकास योजनाओं का लाभ सभी क्षेत्रों तक समान रूप से पहुंचेगा।
इस बैठक का एक राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। कृष्णपाल गुर्जर और गौरव गौतम लंबे समय बाद एक साथ सार्वजनिक मंच पर नजर आए। पिछले कुछ समय से दोनों नेताओं के बीच मतभेद और अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल होने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में बनी हुई थीं। ऐसे में दोनों नेताओं का एक मंच साझा करना और संयुक्त रूप से जिला परिषद विवाद का समाधान निकालना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भाजपा संगठन के भीतर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।