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मोहाली-खरड़ में पेयजल संकट: नल सूखे तो कहीं मटमैला पानी

समर न्यूज | मोहाली
मोहाली और खरड़ के तेजी से फैलते शहरी क्षेत्र में पेयजल संकट अब केवल गर्मियों में कम दबाव या कुछ घंटों की कटौती तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ मोहाली के कई सेक्टरों और विकसित हो रही कॉलोनियों में लोगों को मटमैले या गंदे पानी की शिकायत है, तो दूसरी ओर खरड़ के कुछ इलाकों में कई-कई दिन तक नलों में पानी नहीं पहुंचने से परिवार निजी टैंकरों पर निर्भर हैं। कहीं लोग पानी भरने के लिए रात तक इंतजार कर रहे हैं तो कहीं पीने के लिए बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि नियमित जलापूर्ति के साथ पानी की गुणवत्ता भी अब बड़ा सवाल बन गई है।
मौजूदा संकट की तस्वीर को केवल एक कारण से नहीं समझा जा सकता। मोहाली शहर का बड़ा हिस्सा कजौली वाटर वर्क्स से मिलने वाली आपूर्ति पर निर्भर है, जबकि कुछ इलाके ट्यूबवेल और स्थानीय स्रोतों से पानी लेते हैं। दूसरी ओर मोहाली से खरड़ की ओर तेजी से बढ़ा शहरी विस्तार, नई आवासीय कॉलोनियों का निर्माण और आबादी में वृद्धि ने मौजूदा बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ाया है।
{केस स्टडी-1 : नल में आया पानी, लेकिन इस्तेमाल के लायक नहीं: मोहाली के विभिन्न सेक्टरों से सामने आ रही शिकायतों में सबसे गंभीर चिंता पानी के मटमैले होने की है। लोगों का कहना है कि कई बार नलों में पानी आने के बावजूद उसे पीने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कुछ परिवारों को पहले पानी को कुछ देर स्थिर रखने और फिर छानने के बाद घरेलू काम में इस्तेमाल करना पड़ता है। पीने और खाना बनाने के लिए आरओ या बोतलबंद पानी पर निर्भरता बढ़ रही है। निवासियों के अनुसार, समस्या केवल एक-दो घरों तक सीमित होने पर इसे घरेलू टंकी की सफाई से जोड़कर देखा जा सकता है, लेकिन जब एक ही इलाके के कई घरों से एक जैसी शिकायतें आती हैं तो पाइपलाइन और वितरण व्यवस्था की जांच जरूरी हो जाती है। स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठता है कि यदि किसी इलाके में पानी की गुणवत्ता खराब है तो विभाग नियमित रूप से नमूने लेकर उसकी जांच क्यों नहीं कराता और रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती।
{केस स्टडी-2 : खरड़ में ट्यूबवेल खराब, घरों में सूखे नल: खरड़ और आसपास के तेजी से विकसित हो रहे इलाकों की समस्या इससे अलग लेकिन उतनी ही गंभीर है। हाल की शिकायतों में ट्यूबवेल खराब होने के कारण पेयजल आपूर्ति बाधित होने का मामला सामने आया। इससे प्रभावित परिवारों को कई दिनों तक नियमित पानी नहीं मिला। लोगों ने तत्काल ट्यूबवेल की मरम्मत के साथ सामान्य आपूर्ति बहाल होने तक टैंकर भेजने की मांग की। ऐसे मामलों में सबसे अधिक परेशानी उन परिवारों को होती है जिनके पास अपनी पानी की टंकी या वैकल्पिक बोरवेल की सुविधा नहीं है। बहुमंजिला इमारतों और बड़ी आवासीय कॉलोनियों में पानी की खपत अधिक होने के कारण कुछ घंटों की आपूर्ति बाधित होने का असर भी पूरे दिन दिखाई देता है। कई परिवारों को निजी टैंकर मंगाने पड़ते हैं। पानी की गुणवत्ता भी खराब है।
{केस स्टडी-3 : न्यू सन्नी एन्क्लेव का पुराना संकट: मोहाली-खरड़ बेल्ट में न्यू सन्नी एन्क्लेव, सेक्टर-125 का उदाहरण बताता है कि पेयजल संकट केवल अस्थायी तकनीकी खराबी का परिणाम नहीं है। बड़ी संख्या में टैंकर भेजे जाने के बावजूद लोगों ने पर्याप्त पानी नहीं मिलने की शिकायत की थी। स्थानीय लोगों का कहना था कि नियमित सरकारी आपूर्ति के अभाव में निजी टैंकरों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। इस क्षेत्र में पानी की समस्या का एक दूसरा पहलू भी सामने आया था। एक मामले में अवैध बिजली कनेक्शन के जरिये चल रहे ट्यूबवेल की बिजली काटे जाने के बाद क्षेत्र की जलापूर्ति पूरी तरह प्रभावित होने की बात सामने आई। इससे यह सवाल उठा कि तेजी से विकसित हो रही कॉलोनियों में पानी की स्थायी व्यवस्था किए बिना आबादी बसने देने का खामियाजा अंततः आम लोगों को क्यों भुगतना पड़ रहा है।

संकट के पीछे तेजी से बढ़ता शहरी विस्तार, नई आबादी का बोझ बढ़ने से स्थानीय स्रोतों पर बढ़ सकती है निर्भरता

मोहाली और खरड़ के बीच का क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है। नई कॉलोनियां, अपार्टमेंट और व्यावसायिक परियोजनाएं लगातार बढ़ी हैं। लेकिन पानी की उपलब्धता और वितरण नेटवर्क का विस्तार उसी गति से हुआ या नहीं, यह बड़ा सवाल है। पुराने इलाकों के लिए तैयार की गई जलापूर्ति व्यवस्था पर नई आबादी का बोझ बढ़ने से कम दबाव, अनियमित आपूर्ति और स्थानीय स्रोतों पर निर्भरता बढ़ सकती है। समस्या का एक पहलू भूजल भी है। जहां पाइप से नियमित पानी नहीं पहुंचता, वहां ट्यूबवेल तत्काल समाधान बन जाते हैं। लेकिन लंबे समय में यह भूजल पर दबाव बढ़ा सकता है। यदि ट्यूबवेल खराब हो जाए या बिजली आपूर्ति बाधित हो जाए तो पूरा इलाका संकट में आ जाता है। सतही जल, ट्यूबवेल और वैकल्पिक स्रोतों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
{प्रशासन का दावा : शिकायतों पर कार्रवाई और वैकल्पिक व्यवस्था…
प्रशासन और नगर निकायों की ओर से समय-समय पर कहा गया है कि जलापूर्ति से जुड़ी शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जा रहा है। मोहाली नगर निगम ने नागरिक सेवाओं की निगरानी के लिए क्षेत्रवार जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था भी शुरू की है। इसके तहत अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में पानी, सीवरेज, सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं की निगरानी करनी है तथा शिकायतों के निपटारे पर जवाबदेही तय करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय स्तर की शिकायतें लंबे समय तक लंबित न रहें। प्रशासन की ओर से यह भी तर्क दिया जाता रहा है कि पानी की आपूर्ति कई स्तरों पर निर्भर करती है। कहीं मुख्य जलस्रोत में तकनीकी समस्या आती है, कहीं पाइपलाइन टूटती है और कुछ क्षेत्रों में स्थानीय ट्यूबवेल पर निर्भरता रहती है। ऐसे में हर क्षेत्र की समस्या का समाधान अलग तरीके से करना पड़ता है। अधिकारियों के सामने चुनौती यह भी है कि सीमित संसाधनों के बीच तेजी से बढ़ती आबादी को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाए। खरड़ क्षेत्र में टैंकरों की व्यवस्था भी इसी तरह की आपात राहत का हिस्सा है। नगर निकाय स्तर पर टैंकरों की उपलब्धता के लिए निविदाएं जारी किए जाने से संकेत मिलता है कि प्रशासन भी कुछ इलाकों में वैकल्पिक जलापूर्ति की आवश्यकता को स्वीकार करता है।
{सिर्फ टैंकर नहीं, स्थायी समाधान जरूरी: मोहाली-खरड़ का मौजूदा पेयजल संकट एक बड़े शहरी नियोजन सवाल की ओर इशारा करता है। यदि किसी इलाके में लगातार मटमैला पानी आ रहा है तो केवल पाइपलाइन फ्लश करने से समस्या खत्म नहीं होगी। जलस्रोत से लेकर घर की टंकी तक पूरी वितरण श्रृंखला की जांच करनी होगी। इसी तरह यदि किसी कॉलोनी में बार-बार कई दिनों तक पानी नहीं आता तो हर बार टैंकर भेजना स्थायी समाधान नहीं है। वहां जलापूर्ति नेटवर्क की क्षमता, पाइपलाइन और वैकल्पिक स्रोतों की समीक्षा जरूरी है।
{जवाबदेही और पानी की गुणवत्ता…
सबसे जरूरी कदम नियमित जल गुणवत्ता जांच और उसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक करना हो सकता है। इससे यह स्पष्ट होगा कि समस्या वास्तव में मुख्य पाइपलाइन में है, स्थानीय नेटवर्क में या किसी आवासीय परिसर की आंतरिक पाइपलाइन में। प्रशासन को शिकायत मिलने के बाद पानी के नमूने लेने, जांच रिपोर्ट देने और समस्या के समाधान की समयसीमा तय करने की व्यवस्था मजबूत करनी होगी। नागरिकों की शिकायतों के लिए एक प्रभावी शिकायत तंत्र भी जरूरी है, ताकि लोग बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय एक ही माध्यम से शिकायत दर्ज कर उसका निपटारा देख सकें।
{बढ़ती आबादी के साथ बढ़ानी होगी क्षमता: मोहाली और खरड़ के विस्तार को देखते हुए अगले कुछ वर्षों की पानी की जरूरत का अभी से आकलन करना होगा। नई कॉलोनियों और बड़े आवासीय प्रोजेक्टों को मंजूरी देते समय जलापूर्ति की क्षमता को प्राथमिक शर्त बनाया जाना चाहिए। कजौली से मिलने वाली आपूर्ति, स्थानीय ट्यूबवेल और वैकल्पिक जलस्रोतों के बीच समन्वित योजना तैयार करने की जरूरत है। जब तक यह दीर्घकालिक योजना जमीन पर नहीं उतरती, तब तक मटमैले पानी और सूखे नलों की दोहरी समस्या समय-समय पर लौटती रहेगी।

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