एजेंसी | नई दिल्ली
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) 2024 के कथित पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के आरोपपत्र में कई अहम खुलासे किए गए हैं।
जांच एजेंसी का दावा है कि प्रश्नपत्र लीक करने की साजिश परीक्षा से कई महीने पहले ही रच ली गई थी और इसके लिए संगठित तरीके से पूरे नेटवर्क ने काम किया। आरोपपत्र के अनुसार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया से जुड़े कुछ विशेषज्ञों ने प्रश्नों को याद किया और बाद में होटल पहुंचकर उन्हें कागज की पर्चियों पर लिखकर अन्य आरोपियों तक पहुंचाया। जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को दरकिनार करते हुए कुछ लोगों ने अपनी याददाश्त के आधार पर प्रश्न और उनके उत्तर दोबारा तैयार किए। इसके बाद इन्हें कथित तौर पर ऐसे अभ्यर्थियों और बिचौलियों तक पहुंचाया गया, जिन्होंने परीक्षा से पहले मोटी रकम लेकर यह सामग्री उपलब्ध कराई।
जांच एजेंसी का कहना है कि पूरी योजना बेहद गोपनीय तरीके से संचालित की गई ताकि किसी स्तर पर संदेह न हो। आरोपपत्र के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क में शिक्षा माफिया, बिचौलियों, सॉल्वर गिरोह और विभिन्न राज्यों में सक्रिय एजेंटों की भूमिका सामने आई है। जांच के दौरान बिहार, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में कई स्थानों पर छापेमारी की गई। अब तक इस मामले में अनेक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और कई आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग अदालतों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल फोन, चैट, बैंक लेनदेन, यात्रा विवरण और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी गई हैं। आरोप है कि पेपर लीक के एवज में लाखों रुपये की अवैध वसूली की गई और कई अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले पहुंचाया गया। आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।
जांच अभी भी जारी
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो का कहना है कि मामले की जांच अभी समाप्त नहीं हुई है। एजेंसी पूरे नेटवर्क की वित्तीय लेनदेन, अन्य संभावित आरोपियों और साजिश से जुड़े अतिरिक्त साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। जांच के दायरे में उन लोगों की भूमिका भी है, जिन्होंने प्रश्नपत्र तैयार करने, सुरक्षित रखने और वितरण प्रक्रिया में किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन किया।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस मामले ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रश्नपत्र निर्माण, परिवहन और परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित तथा तकनीक आधारित बनाने की आवश्यकता है। वहीं, मामले की सुनवाई विभिन्न अदालतों में जारी है और अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।