लखनऊ | उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा को और अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के लिए ‘लर्निंग बाय डूइंग’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह पहल समग्र शिक्षा अभियान के तहत शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ हाथों के कौशल में दक्ष बनाना है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शुरू हुए इस कार्यक्रम में छात्रों को लकड़ी और धातु कार्य, ऊर्जा एवं पर्यावरण, कृषि-बागवानी, स्वास्थ्य और पोषण जैसे विषयों में प्रायोगिक व वास्तविक जीवन से जुड़े अनुभव प्रदान किए जाएंगे।
शिक्षकों को ‘मल्टी स्किलिंग’ पर दिया गया प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “कौशल युक्त शिक्षा” की परिकल्पना को साकार करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने विज्ञान और गणित के शिक्षकों को चार दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया है, जिससे वे विषय पढ़ाने के साथ-साथ छात्रों को जीवनोपयोगी स्किल भी सिखा सकें।
यूनिसेफ और विज्ञान आश्रम के तकनीकी सहयोग से 60 स्किल-आधारित गतिविधियों का एक विस्तृत शिक्षक मार्गदर्शिका (Teacher Manual) भी तैयार किया गया है, जिसे राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने मान्यता दी है।
2274 स्कूलों में बनीं आधुनिक प्रयोगशालाएं, जल्द 3288 और स्कूल होंगे शामिल
वर्ष 2024-25 के दौरान इस नवाचार को आगे बढ़ाते हुए 75 जिलों के 2274 उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट स्कूलों में आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। हर प्रयोगशाला को 205 प्रकार के टूल्स और उपकरणों से लैस किया गया है।
सरकार का अगला लक्ष्य है कि इस कार्यक्रम को 3288 और विद्यालयों में विस्तारित किया जाए। इसका विस्तार समग्र शिक्षा अभियान और पीएमश्री योजना के तहत किया जाएगा। इससे लाखों विद्यार्थियों को व्यावसायिक और स्किल आधारित शिक्षा का सीधा लाभ मिलेगा, जो उन्हें भविष्य के लिए आत्मनिर्भर बनाएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल शिक्षा को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखती, बल्कि छात्रों को जीवन उपयोगी कौशलों से लैस करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।