लखनऊ | प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अवैध धर्मांतरण रैकेट के मुख्य आरोपी जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा की संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जांच तेज कर दी है। ईडी ने इस मामले में उत्तर प्रदेश एटीएस, राज्य प्रशासन और कुछ बैंकों को पत्र भेजकर उससे जुड़े लोगों की आर्थिक जानकारी मांगी है। बताया जा रहा है कि जलालुद्दीन का असली नाम करीमुल्ला शाह है और वह यूपी के बलरामपुर जिले का रहने वाला है।
ईडी की लखनऊ जोनल यूनिट ने धनशोधन रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत केस दर्ज किया है। एजेंसी अब आरोपी से पूछताछ के लिए कोर्ट में हिरासत रिमांड की मांग करने की तैयारी कर रही है।
40 खातों में जमा हुए 106 करोड़ रुपये, विदेश से आए फंड
एजेंसी सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि जलालुद्दीन और उसके साथियों के नाम से लगभग 40 बैंक खाते संचालित हो रहे थे, जिनमें करीब 106 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं। बताया गया कि इनमें अधिकांश फंडिंग मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया) से की गई थी।
गौरतलब है कि जलालुद्दीन के साथ उसका बेटा महमूद, और दो सहयोगी नवीन उर्फ जमालुद्दीन और नीतू उर्फ नसरीन पहले ही एटीएस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। ये सभी आरोपी लखनऊ के गोमती नगर थाने में दर्ज केस के आधार पर जांच के घेरे में आए।
धर्मांतरण के लिए बनाया नेटवर्क, दरगाह से होता था संचालन
ईडी की जांच में सामने आया है कि जलालुद्दीन ने एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया था, जो बलरामपुर स्थित चांद औलिया दरगाह से संचालित होता था। यहां बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे, जिनमें देश-विदेश के लोग शामिल होते थे।
सूत्रों के अनुसार, जलालुद्दीन ने अपनी धार्मिक किताब ‘शिजरा-ए-तैय्यबा’ और प्रचार-प्रसार के माध्यम से इस्लाम के प्रचार के साथ हिंदू, अनुसूचित जाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों को संगठित रूप से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित और प्रलोभित किया।
संपत्तियों और फंडिंग की जानकारी मांगी
ईडी ने अब इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक नींव को खंगालने के लिए एटीएस, बलरामपुर प्रशासन और बैंकों के धनशोधन रोधी विभागों से जलालुद्दीन, उसके परिवार और सहयोगियों की चल-अचल संपत्तियों, बैंक डिटेल्स और लेन-देन की पूरी जानकारी तलब की है।
ईडी का यह कदम इस मामले में आर्थिक अपराध की परतें खोलने की दिशा में बड़ा माना जा रहा है। एजेंसी जल्द ही इस मामले में और भी खुलासे कर सकती है।