Summer express, धर्मवीर ,मंडी। आजादी के अमृत महोत्सव के बीच हिमाचल प्रदेश की छोटी काशी मंडी में डाक विभाग ने तकनीक के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया। देश में पहली बार भारतीय डाक ने ड्रोन के माध्यम से तिरंगे की डिलीवरी की। यह तिरंगा मंडी हेड पोस्ट ऑफिस से ड्रोन के जरिए रेहड़धार ब्रांच पोस्ट ऑफिस तक पहुंचाया गया, जहां से इसे एक आर्मी वेटरन के घर तक पहुंचाया गया।
14 अगस्त को हुई इस ऐतिहासिक डिलीवरी के दौरान केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े रहे। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से तिरंगे की पहली ड्रोन डिलीवरी का शुभारंभ किया और इस ऐतिहासिक पहल के गवाह बने।
डाक विभाग के अनुसार, मंडी हेड पोस्ट ऑफिस से तिरंगे का पार्सल ड्रोन के माध्यम से रेहड़धार ब्रांच पोस्ट ऑफिस भेजा गया। वहां तैनात डाक विभाग की टीम ने पार्सल प्राप्त किया और निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसे सेना के एक पूर्व जवान तक पहुंचाया।
भारतीय डाक की यह अपनी तरह की पहली ड्रोन डिलीवरी मानी जा रही है। इस पहल को आधुनिक तकनीक के जरिए डाक विभाग के विशाल नेटवर्क को और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खासतौर पर दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से अंतिम छोर तक डिलीवरी को आसान और तेज बनाने में मदद मिल सकती है।
हिमाचल और असम में 150 मार्गों पर ड्रोन सेवा की तैयारी
डाक विभाग ने भविष्य में ड्रोन आधारित डाक परिवहन को व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना तैयार की है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश और असम में करीब 150 चिन्हित मार्गों पर ड्रोन आधारित डाक ट्रांसमिशन की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में डाक सेवाओं की पहुंच को मजबूत करना और मेल डिलीवरी को अधिक तेज, सुरक्षित और कुशल बनाना है। पहाड़ी तथा कठिन रास्तों वाले क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक पारंपरिक डाक नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण सहयोगी साबित हो सकती है।
मंडी में तिरंगे की ड्रोन डिलीवरी ने न केवल भारतीय डाक के तकनीकी बदलाव को प्रदर्शित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल देश के दूरदराज क्षेत्रों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाने के लिए किस तरह किया जा सकता है।