अनुज पंचाल, गुरुग्राम। डीएलएफ इलाके में सुबह रनिंग कर रहे धावकों को कथित तौर पर बाउंसरों द्वारा रोकने और उनके साथ बदसलूकी करने का मामला सामने आया है। घटना सुबह करीब छह बजे की बताई जा रही है, जब कुछ रनर्स वेदांता हाफ मैराथन की तैयारी के लिए दौड़ लगा रहे थे। धावकों का आरोप है कि QRT लिखी बोलेरो गाड़ियों में पहुंचे बाउंसरों ने उनका रास्ता रोक दिया और सड़क को निजी बताते हुए वहां से चले जाने को कहा।
सेक्टर-57 निवासी धावक लवेश के अनुसार, वह अन्य रनर्स के साथ नियमित रूप से रनिंग कर रहे थे। इसी दौरान कुछ बाउंसर गाड़ियों से मौके पर पहुंचे और धावकों को रोक दिया। आरोप है कि बाउंसरों ने कहा कि वे इन सड़कों की सुरक्षा करते हैं और रनर्स को तत्काल वहां से हटने के लिए कहा। विरोध करने पर कथित तौर पर धावकों और राहगीरों को डराने-धमकाने की कोशिश की गई।
लवेश का आरोप है कि बाउंसरों ने जिस वाहन का इस्तेमाल किया, उस पर QRT लिखा हुआ था। साथ ही वाहनों पर पुलिस सायरन और हूटर लगे होने का भी दावा किया गया है। इसको लेकर धावकों ने सवाल उठाया है कि यदि सड़क सार्वजनिक है तो निजी सुरक्षा कर्मियों को लोगों को वहां से हटाने का अधिकार किसने दिया।
रनर्स का कहना है कि सार्वजनिक सड़कों पर मॉर्निंग रनिंग करने वाले लोगों को इस तरह रोकना और सड़क को निजी बताना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि निजी बाउंसरों को QRT लिखी गाड़ियों और हूटर के इस्तेमाल की अनुमति किस विभाग या अधिकारी ने दी है।
धावकों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा के नाम पर बिना किसी सरकारी या आधिकारिक आदेश के वीआईपी क्षेत्र की सड़कों पर निजी सुरक्षाकर्मियों द्वारा दबदबा बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में सुरक्षा से संबंधित प्रतिबंध हैं तो इसकी जानकारी आधिकारिक रूप से लोगों को दी जानी चाहिए, न कि बाउंसरों के माध्यम से उन्हें डराकर रोका जाए।
मामले को लेकर डीएलएफ और संबंधित सिक्योरिटी एजेंसी का पक्ष जानने के लिए पीआर टीम से संपर्क किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला था। अब पूरे मामले में यह सवाल बना हुआ है कि रनर्स को रोकने के लिए बाउंसरों को किस स्तर से निर्देश दिए गए थे और QRT लिखी गाड़ियों व हूटर के इस्तेमाल की अनुमति किस आधार पर दी गई।