Summer express, लुधियाना | पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) से संबद्ध स्कूलों में 8वीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है। प्रस्तावित योजना 1 सितंबर से लागू किए जाने की बात कही जा रही है। इसको लेकर पंजाब के शिक्षा जगत और अभिभावकों के बीच चर्चा तेज हो गई है। योजना के तहत विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम से AI से जुड़े विषयों की जानकारी दी जाएगी।
प्रस्ताव के अनुसार, PSEB से संबद्ध निजी स्कूलों के विद्यार्थियों से हर महीने 100 रुपये शुल्क लिया जा सकता है, जबकि सरकारी स्कूलों में यह सुविधा निशुल्क रखने की बात सामने आई है। इस कार्यक्रम का संचालन सिंगापुर की एक निजी कंपनी द्वारा किए जाने की जानकारी है। विद्यार्थियों के लिए करीब 35 से 40 मिनट की ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। बोर्ड को उम्मीद है कि 8वीं से 12वीं कक्षा के करीब 80 प्रतिशत विद्यार्थी इस कार्यक्रम से जुड़ेंगे।
योजना के लिए विद्यार्थियों का पंजीकरण ‘सरबत AI पोर्टल’ के माध्यम से कराने का प्रस्ताव है। मासिक शुल्क के अलावा साल में तीन बार होने वाली परीक्षाओं के लिए 50 रुपये, दो यूनिट टेस्ट के लिए 10 रुपये और किताब के लिए 73 रुपये प्रति विद्यार्थी शुल्क निर्धारित किए जाने की बात कही गई है।
शिक्षकों को भी AI शिक्षा के लिए प्रशिक्षित करने की योजना है। इसके तहत प्रत्येक स्कूल से दो अध्यापकों को प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव रखा गया है। चार सप्ताह की ट्रेनिंग के पहले वर्ष के लिए प्रति शिक्षक 800 रुपये शुल्क बताया गया है, जबकि तीन साल की पूरी प्रशिक्षण प्रक्रिया में प्रति शिक्षक करीब 21 हजार रुपये खर्च होने की बात सामने आई है।
हालांकि, योजना को लेकर कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। कई स्कूलों में पर्याप्त कंप्यूटर लैब, इंटरनेट कनेक्टिविटी और अन्य डिजिटल सुविधाओं की कमी है। ऑनलाइन कक्षाओं के बाद विद्यार्थियों को घर पर सेल्फ स्टडी के लिए मोबाइल, लैपटॉप या इंटरनेट की आवश्यकता होगी। ऐसे में अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
शिक्षकों का यह भी कहना है कि शैक्षणिक सत्र शुरू हुए करीब पांच महीने बीत चुके हैं और ऐसे समय में नई व्यवस्था लागू करने से नियमित पढ़ाई पर असर पड़ सकता है। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान भी शिक्षकों ने योजना को लागू करने से जुड़ी सुविधाओं और खर्च को लेकर सवाल उठाए।
अभिभावकों और शिक्षकों ने सरकार व शिक्षा विभाग से योजना के शुल्क, पंजीकरण, प्रशिक्षण और डिजिटल सुविधाओं से जुड़े प्रावधानों की दोबारा समीक्षा करने की मांग की है, ताकि AI शिक्षा लागू करने के साथ विद्यार्थियों और परिवारों पर अनावश्यक वित्तीय या शैक्षणिक दबाव न पड़े।