Summer express/नूरपुर, संजीव-: विधानसभा नूरपुर के राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सुलियाली में देशसेवा के दौरान शहीद हुए गांव नेरा निवासी चैन सिंह की स्मृति में स्मारक का अनावरण किया गया। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की द्वितीय वाहिनी के जवानों ने कमांडेंट सौरभ दुबे के निर्देशन में स्मारक का अनावरण किया। इस अवसर पर शहीद के परिजनों, स्कूल स्टाफ, पंचायत प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, ग्रामीणों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने उपस्थित होकर वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम के दौरान शहीद चैन सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उनके सर्वोच्च बलिदान को याद किया। शहीद की वीरांगना पत्नी मंजू देवी सहित परिजनों और ग्रामीणों ने उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को नमन किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राणों का बलिदान देने वाले वीर जवानों का योगदान देश कभी नहीं भूल सकता।
जानकारी के अनुसार शहीद चैन सिंह का जन्म 5 मई 1972 को ग्राम नेरा, डाकघर सुलियाली, तहसील नूरपुर में हुआ था। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा इसी विद्यालय से प्राप्त की। देशसेवा की भावना से प्रेरित होकर वह 6 अप्रैल 1993 को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल में भर्ती हुए। सेवा के दौरान उनकी कर्तव्यनिष्ठा और साहस को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें कई बार नगद पुरस्कारों से सम्मानित किया।वर्ष 1998 में आईटीबीपी में सेवाएं देते हुए चैन सिंह को पर्वतारोहण एवं स्कीइंग संस्थान, औली (उत्तराखंड) में पर्वतारोहण प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था। प्रशिक्षण के दौरान माणा से लगभग 12 किलोमीटर दूर वह हिमस्खलन की चपेट में आ गए। राष्ट्रसेवा करते हुए 18 अक्टूबर 1998 को उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी।शहीद चैन सिंह अपने पीछे माता-पिता, दो छोटे भाइयों और विवाह के लगभग एक वर्ष बाद पत्नी को छोड़ गए थे। वक्ताओं ने कहा कि स्मारक केवल शहीद की स्मृति को जीवंत रखने का माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और युवा पीढ़ी के लिए राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और देशसेवा की प्रेरणा का केंद्र भी बनेगा।इस अवसर पर लोहारपुरा पंचायत प्रधान सपना, उपप्रधान बलविंदर सिंह जौनू, सुलियाली पंचायत प्रधान टीनू, स्कूल प्रधानाचार्य कुलदीप अत्री, शिक्षक, सेवानिवृत्त पदाधिकारी, ग्रामीण तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। शहीद परिवार को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया गया। कार्यक्रम का समापन ‘जय हिंद’ के उद्घोष के साथ हुआ।