Facebook-f Youtube Summer Express - Header One X-twitter

नशे की लत से निकले युवा करेंगे पंजाब के नशा-मुक्ति और वेलनेस केंद्रों की निगरानी

समर न्यूज | चंडीगढ़

पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ लड़ाई में एक नया कदम उठाते हुए उन युवाओं को निगरानी व्यवस्था का हिस्सा बनाने का फैसला किया है, जो नशे की लत से सफलतापूर्वक बाहर निकल चुके हैं। रिहैबिलिटेशन के बाद सामान्य जीवन में लौटे इन युवाओं को ‘सूरमा’ के रूप में जिला स्तर पर गठित होने वाले बोर्डों में शामिल किया जाएगा। ये बोर्ड नशा-मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों के कामकाज की निगरानी करने के साथ मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाओं पर भी नजर रखेंगे।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार, सरकार राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण को मजबूत करने के लिए जिला स्तर पर गैर-सरकारी सदस्यों वाले बोर्ड गठित कर रही है। इनमें मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक और परामर्शदाता शामिल होंगे। इनके साथ ऐसे युवाओं और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से उबर चुके लोगों को भी जगह दी जाएगी, जिन्होंने खुद नशे या मानसिक स्वास्थ्य संकट का सामना किया है।
सरकार की इस पहल के पीछे यह सोच है कि नशे से उबर चुके युवा केंद्रों की वास्तविक स्थिति को अधिक व्यावहारिक तरीके से समझ सकते हैं। उन्होंने खुद उपचार, पुनर्वास और दोबारा सामान्य जीवन में लौटने की प्रक्रिया का सामना किया है। ऐसे में केंद्रों में मरीजों के साथ व्यवहार, उपचार की गुणवत्ता, पुनर्वास के माहौल और उनकी समस्याओं को समझने में उनका अनुभव उपयोगी हो सकता है। इन जिला बोर्डों की भूमिका केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेगी। इन्हें मानसिक स्वास्थ्य क्लीनिकों और पुनर्वास केंद्रों को नियंत्रित करने, संस्थानों को मान्यता और संबद्धता देने की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। मरीजों को अपनी शिकायतें रखने के लिए भी इन बोर्डों के माध्यम से एक मंच मिलेगा। इससे उपचार केंद्रों की जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
{घर तक पहुंचाने की योजना: सरकार उपचार को केवल केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय मरीजों तक उनके घर पर पहुंचाने की दिशा में भी काम कर रही है। ‘कम्युनिटी ब्रिज कार्यक्रम’ के तहत नशे की समस्या से जूझ रहे लोग टेली-मानस के माध्यम से परामर्श ले सकेंगे और जरूरत के अनुसार दवाएं उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य उन लोगों तक भी उपचार पहुंचाना है, जो किसी कारण से नशा-मुक्ति केंद्र तक नहीं पहुंच पाते।
{उबर चुके युवाओं की नई भूमिका: नशे से बाहर निकल चुके युवाओं को व्यवस्था की निगरानी में शामिल करने का कदम पुनर्वास की अवधारणा को भी नया अर्थ देता है। अब तक ऐसे युवाओं को मुख्य रूप से उपचार के लाभार्थी के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन सरकार उन्हें नीति और निगरानी प्रक्रिया में भागीदार बनाने की कोशिश कर रही है। इससे समाज में यह संदेश भी जा सकता है कि नशे की लत से बाहर निकलने वाला व्यक्ति दोबारा जिम्मेदार भूमिका निभा सकता है।
{जवाबदेही बढ़ाना चुनौती: हालांकि इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जिला बोर्डों को कितने अधिकार दिए जाते हैं। केवल बोर्ड में उबर चुके युवाओं को शामिल करना पर्याप्त नहीं होगा। उनकी बात को निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक महत्व, शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई व केंद्रों के निरीक्षण की व्यवस्था भी जरूरी होगी। सरकार के सामने चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि निगरानी व्यवस्था कागजों तक सीमित न रहे और इससे पंजाब में नशा-मुक्ति तथा पुनर्वास सेवाओं की गुणवत्ता वास्तव में बेहतर हो।

पंजाब में 213 नशा-मुक्ति केंद्र
स्वास्थ्य विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में इस समय 213 नशा-मुक्ति केंद्र और 90 पुनर्वास केंद्र हैं। इसके अलावा 547 बाह्य रोगी ओपिओइड सहायक उपचार यानी ओओएटी केंद्रों के माध्यम से भी नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार दिया जा रहा है। जेलों में 19 ओओएटी केंद्र और 10 नशा-मुक्ति-सह-वेलनेस केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। इतने बड़े नेटवर्क के बीच निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। खासकर निजी और पुनर्वास केंद्रों में मरीजों के साथ व्यवहार, चिकित्सकीय सुविधाओं, दवाओं के इस्तेमाल, स्टाफ की उपलब्धता और सुरक्षा जैसे पहलुओं पर लगातार नजर रखना जरूरी है। हाल के समय में राज्य में अवैध नशा-मुक्ति केंद्रों पर कार्रवाई और वहां से युवाओं को बाहर निकालने के मामले भी सामने आए हैं, जिससे प्रमाणित और जिम्मेदार उपचार व्यवस्था की जरूरत और स्पष्ट होती है।

मानसिक स्वास्थ्य को भी जोड़ा
सरकार ने इस पहल में केवल नशे की समस्या को अलग करके नहीं देखा है। नशे की लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बीच संबंध को ध्यान में रखते हुए मानसिक स्वास्थ्य से उबर चुके लोगों को भी जिला बोर्डों में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मानसिक स्वास्थ्य उपचार लेने वाले लाभार्थियों में 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से अधिक रही है। सात महीने की अवधि में योजना के तहत 709 लाभार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य उपचार लिया, जिस पर 83.36 लाख रुपये का उपचार खर्च हुआ। इनमें 18 से 30 वर्ष के 249 और 31 से 45 वर्ष के 284 लाभार्थी शामिल थे।

admin

Horizonbeg@gmail.com https://summerexpress.in

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Trending

राहुल की दिनदहाड़े हत्या से स्तब्ध हूं, जवाबदेही की जरूरत : वड़िंग

दलजीत विक्की | लुधियानासमर न्यूज लुधियाना के सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने शहर के मशहूर पंडित छोले-कुलचे वाले के बेटे राहुल की दिनदहाड़े बेरहमी से की गई हत्या पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर इस घटना को बेहद परेशान करने वाला बताया और पंजाब में...

नाम रस को जीवन में स्थान दें: पुंडरीक गोस्वामी जी

लक्की भट्टी | लुधियानासमर न्यूजसिविल लाइंस स्थित श्री सिद्ध पीठ श्री दंडी स्वामी मंदिर में श्री सिद्ध पीठ परिकर एवं बदाना मंडल सेवक सिद्ध पीठ की ओर से पं. राज कुमार शर्मा जी की अध्यक्षता में भव्य संकीर्तन भाव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रीधाम वृंदावन से परम पूज्य पुण्डरीक गोस्वामी जी महाराज...

रंदारी नहीं मिली तो इमिग्रेशन दफ्तर पर चलाईं गोलियां, एक आरोपी काबू

सहजप्रीत सिंह | लुधियानासमर न्यूज लुधियाना के मॉडल टाउन स्थित ब्राइट वे वीजा इमिग्रेशन कार्यालय पर फायरिंग करने के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि कार्यालय के मालिक से रंगदारी मांगी गई थी। रकम नहीं मिलने पर आरोपियों ने दहशत फैलाने के लिए कार्यालय...

तीन सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों में 3 साल से बिना ठेके चल रही कैंटीनें

पूर्वी, पश्चिमी और सेंट्रल कार्यालयों में नहीं हुई बोली; अधिकारियों ने कहा- मामला ध्यान में नहीं था, अब जल्द शुरू करवाएंगे प्रक्रियाराजवीर बक्शी | समर न्यूजलुधियाना लुधियाना के तीन सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में सरकारी परिसर के भीतर चल रही कैंटीनों के ठेके को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, पूर्वी, पश्चिमी और सेंट्रल...

लुधियाना में प्रसव के बाद महिला ने तोड़ा दम, गुस्साए परिजनों ने शव रखकर अस्पताल के बाहर किया हंगामा

सहजप्रीत सिंह | लुधियानासमर न्यूज बेटी के जन्म से घर में गूंजी किलकारियां कुछ ही घंटों में मातम में बदल गईं। थाना डिवीजन नंबर-6 के इलाके में स्थित जीके अस्पताल में डिलीवरी के बाद महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका की पहचान खुशबू के रूप में हुई है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन...
Summer Express - header one

हम लाते हैं तेज़, साफ़ और भरोसेमंद ख़बरें — शोर के बीच भी सच्चाई तक पहुंचाने वाली।
चाहे ब्रेकिंग न्यूज़ हो या आपके लिए अहम कहानियाँ, हर दिन हम देते हैं समझदारी और रोचक अंदाज़ में कवरेज।

Must Read

©2025- All Right Reserved.