समर न्यूज | रूपनगर
पंजाब ने पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों से जुड़े मामलों के प्रबंधन में नई पहल करते हुए पहली बार दो सेवानिवृत्त महिला सैन्य अधिकारियों को जिला रक्षा सेवा कल्याण अधिकारियों के रूप में नियुक्त किया है। यह नियुक्ति राज्य के रक्षा सेवा कल्याण विभाग के 52 वर्ष के इतिहास में पहली बार हुई है। दोनों अधिकारी पूर्व सैनिकों से संबंधित कल्याणकारी योजनाओं, पेंशन, पुनर्वास और अन्य प्रशासनिक मामलों को संभालेंगी। विभाग में एक और महिला अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया भी चल रही है।
विंग कमांडर अमनप्रीत कौर को रूपनगर में जिला रक्षा सेवा कल्याण अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें शहीद भगत सिंह नगर का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। इसी तरह लेफ्टिनेंट कर्नल अमनदीप कौर को मुक्तसर में तैनाती दी गई है और वह मानसा तथा फाजिल्का जिलों की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभालेंगी। दोनों अधिकारी भारतीय सशस्त्र बलों से सेवानिवृत्त हुई हैं और अब अपने अनुभव का इस्तेमाल पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की समस्याओं के समाधान में करेंगी।
{महिलाओं की बढ़ती भूमिका: रक्षा सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ने के बीच पंजाब की यह नियुक्ति प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सेना और वायुसेना में जिम्मेदार पदों पर काम कर चुकी महिला अधिकारियों को अब पूर्व सैनिकों से जुड़े प्रशासनिक और कल्याणकारी मामलों की जिम्मेदारी मिलना इस बदलाव का संकेत है। पूर्व सैनिकों के मामलों में सैन्य सेवा के दौरान की समस्याओं के साथ पेंशन, चिकित्सा सुविधाएं, आश्रितों की सहायता, रोजगार और पुनर्वास जैसे विषय शामिल होते हैं। इन मामलों को समझने के लिए सैन्य व्यवस्था और उसकी प्रक्रियाओं का अनुभव उपयोगी साबित हो सकता है। ऐसे में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों की नियुक्ति से विभाग और लाभार्थियों के बीच संवाद बेहतर होने की उम्मीद है।
{जिला स्तर पर बढ़ेगी पहुंच: जिला रक्षा सेवा कल्याण अधिकारी पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए सरकार और रक्षा संस्थानों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं। पंजाब में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और उनके परिवार रहते हैं। राज्य की सीमावर्ती स्थिति और सेना में पंजाब की पारंपरिक भागीदारी को देखते हुए इन सेवाओं की मांग भी महत्वपूर्ण है। नई नियुक्तियों से उम्मीद है कि जिलों में लंबित मामलों की निगरानी बेहतर होगी और पूर्व सैनिकों को कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी तथा उनका लाभ लेने में सहायता मिलेगी। अतिरिक्त प्रभार वाले जिलों में भी अधिकारियों की उपलब्धता से प्रशासनिक कामकाज को गति देने की कोशिश की गई है।
{तीसरी नियुक्ति की तैयारी: विभाग में तीसरी महिला रक्षा अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया भी चल रही है। यदि यह नियुक्ति पूरी होती है तो राज्य के जिला रक्षा सेवा कल्याण तंत्र में महिला अधिकारियों की भूमिका और मजबूत होगी। यह कदम उन महिला सैन्य अधिकारियों के लिए भी नई संभावनाएं खोल सकता है जो सेवानिवृत्ति के बाद सार्वजनिक सेवा और पूर्व सैनिक कल्याण से जुड़े क्षेत्रों में योगदान देना चाहती हैं।
{अनुभव का होगा इस्तेमाल: ंजाब में दो महिला रक्षा अधिकारियों की नियुक्ति को केवल लैंगिक प्रतिनिधित्व के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसका वास्तविक महत्व इस बात में है कि सैन्य सेवा का अनुभव अब उसी समुदाय की समस्याओं के समाधान में इस्तेमाल होगा, जिसके लिए ये अधिकारी काम करेंगी। अधिकारियों की कमी दूर होने के साथ यदि जिला स्तर पर नियमित सुनवाई, त्वरित निपटारा और कल्याणकारी योजनाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित होती है तो इसका सीधा लाभ पूर्व सैनिकों, युद्ध विधवाओं और उनके परिवारों को मिल सकता है।
अधिकारियों की कमी बड़ी चुनौती
राज्य में प्रत्येक जिले के लिए जिला रक्षा सेवा कल्याण अधिकारी का पद स्वीकृत है। आम तौर पर इस पद पर लेफ्टिनेंट कर्नल या उसके समकक्ष रैंक के अधिकारी की नियुक्ति होती है। लेकिन लंबे समय से विभाग में अधिकारियों की भारी कमी रही है। स्वीकृत 25 पदों के मुकाबले केवल चार अधिकारी ही उपलब्ध थे, जिनमें मुख्यालय में तैनात अधिकारी भी शामिल हैं। अधिकारियों की कमी के कारण पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों से जुड़े मामलों के निपटारे में प्रशासनिक दबाव बना हुआ था। इस कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने 21 रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया शुरू की। भर्ती प्रक्रिया पंजाब लोक सेवा आयोग के माध्यम से कराई गई। आयोग ने 15 अधिकारियों को शॉर्टलिस्ट किया, जिनमें से अब तक आठ की नियुक्ति की जा चुकी है। भर्ती प्रक्रिया का उद्देश्य केवल रिक्त पदों को भरना नहीं, बल्कि जिला स्तर पर रक्षा सेवा कल्याण विभाग की व्यवस्था को मजबूत करना भी है।