एजेंसी | नई दिल्ली
भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल का रोजगार पर असर दोहरा दिखाई दे रहा है। एआई से जुड़ी नौकरियां खत्म होने के बजाय फिलहाल अधिक संख्या में पैदा हुई हैं, लेकिन इसका फायदा सभी स्तर के कर्मचारियों को समान रूप से नहीं मिल रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2022 से अगस्त 2026 तक एआई से जुड़ी 83,100 नियुक्तियां दर्ज की गईं, जबकि एआई से संबंधित छंटनी और नौकरी छोड़ने के 31,921 मामले सामने आए। यानी हर एक नौकरी के खत्म होने के मुकाबले करीब 2.6 नई नियुक्तियां हुईं।
रिपोर्ट में भारत को एआई के कारण रोजगार बाजार में हो रहे बदलावों को समझने के लिए एशिया का प्रमुख उदाहरण बताया गया है। देश की बड़ी कामकाजी आबादी और वैश्विक आईटी तथा बैक-ऑफिस सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका के कारण एआई का असर यहां बड़े पैमाने पर दिखाई दे रहा है। यह पता नहीं चलता कि हर कर्मचारी के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
एआई के कारण कंपनियों में एंट्री-लेवल कर्मचारियों की जरूरत घट रही है। रिपोर्ट में भारतीय आईटी क्षेत्र की 651 कंपनियों के एक सर्वे का हवाला देते हुए बताया गया कि 55 प्रतिशत कंपनियों ने शुरुआती स्तर की भर्ती में कमी दर्ज की।
नई नौकरियां भी बन रहीं
एआई रोजगार का दूसरा पक्ष नए अवसरों का है। रिपोर्ट के अनुसार, एआई से पैदा हुई 90 प्रतिशत से अधिक नौकरियां प्रौद्योगिकी क्षेत्र में केंद्रित हैं। भारत में नई नियुक्तियों का बड़ा हिस्सा डेटा को व्यवस्थित करने, एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने और भाषाई डेटा से जुड़े कार्यों में है। इसका अर्थ है कि एआई केवल पारंपरिक नौकरियों को प्रभावित नहीं कर रहा, बल्कि नई तरह की भूमिकाएं भी पैदा कर रहा है। हालांकि, इन नई नौकरियों के लिए अलग तरह के कौशल की जरूरत है। केवल सामान्य कंप्यूटर ज्ञान या पारंपरिक कोडिंग सीखना पर्याप्त नहीं हो सकता। कंपनियां एआई उपकरणों के साथ काम करने, डेटा समझने, स्वचालन और समस्या समाधान जैसी क्षमताओं को अधिक महत्व दे रही हैं।