गुरमीत सिंह | डेराबस्सी
समर न्यूज
डेराबस्सी की बेहड़ा रोड पर पंजाब एसिड कम प्राइवेट लिमटेड नामक केमिकल फैक्ट्री की करीब 10 एकड़ जमीन पर कॉलोनी विकसित कर प्लॉट बेचने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बिना जरूरी सरकारी मंजूरियां लिए इस जमीन पर सड़कें बनाने के साथ-साथ अन्य विकास कार्य भी किए जा रहे हैं।
मामला सामने आने के बाद गमाडा और संबंधित प्रशासनिक विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार कॉलोनी का नक्शा सोशल मीडिया पर वायरल कर प्लॉटों की बिक्री का प्रचार किया जा रहा है। वायरल नक्शे के मुताबिक यहां करीब 43 प्लॉट काटे गए हैं, जिनका आकार 700 से 1500 गज तक बताया जा रहा है। आरोप है कि केमिकल फैक्टरी की जमीन पर सड़क बनाने के अलावा कथित तौर पर सीवरेज लाइन बिछाने का काम भी किया गया है।
नियमों के अनुसार किसी भी कॉलोनी को विकसित करने या प्लॉटिंग करने से पहले संबंधित विभागों से आवश्यक मंजूरियां लेना जरूरी होता है। इसके अलावा सरकार को निर्धारित फीस और अन्य विकास शुल्क भी जमा करवाने पड़ते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस मामले में इन नियमों की कथित तौर पर अनदेखी की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि बिना मंजूरी वाली कॉलोनी में प्लॉट खरीदे जाते हैं तो भविष्य में खरीदारों को सड़क, सीवरेज, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं हासिल करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
राजस्व विभाग की भूमिका पर भी सवाल: मामले की पड़ताल के दौरान यह आरोप भी सामने आया है कि इंडस्ट्रियल जमीन को कथित तौर पर कृषि भूमि दर्शाकर रजिस्ट्रियां करवाई गईं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस पहलू की भी जांच की जाए और पता लगाया जाए कि जमीन की रजिस्ट्रियां किन दस्तावेजों और आधार पर की गईं।
इसी बेहड़ा रोड पर थापर यूनिवर्सिटी के नजदीक भी करीब 10 एकड़ कृषि भूमि पर कथित तौर पर कॉलोनी काटने का मामला पहले सामने आ चुका है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के चलते गमाडा की निगरानी और कार्रवाई को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।
इस संबंध में गमाडा के जेई बलकरण सिंह बराड़ ने कहा कि वह मौके का दौरा कर मामले की जांच करेंगे। तहसीलदार बीरकरण सिंह ने भी कहा कि मामले की जांच करवाई जाएगी।