समर न्यूज | चंडीगढ़
पंजाब में लंबित महंगाई भत्ते (डीए) की किस्तों, पुरानी पेंशन योजना समेत विभिन्न मांगों को लेकर सरकारी कर्मचारियों का आंदोलन तेज हो गया है। 27 अगस्त की प्रदेशव्यापी महा-हड़ताल के दौरान सरकारी दफ्तरों, स्कूलों और अस्पतालों में कामकाज प्रभावित रहा।
इसी बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच प्रस्तावित बैठक नहीं हो सकी। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। 30 अगस्त को कर्मचारी नेता बैठक कर अगली रणनीति तय करेंगे। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, डीए की करीब 18 प्रतिशत बकाया किस्तों का भुगतान लंबे समय से लंबित है। इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना लागू करने, अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने तथा वेतन और अन्य वित्तीय लाभों से जुड़ी मांगें भी उठाई जा रही हैं। विभिन्न कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच ने सरकार से इन मुद्दों पर ठोस फैसला लेने की मांग की है।
डीए का मामला अदालत तक भी पहुंच चुका है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को लंबित डीए और महंगाई राहत का बकाया जारी करने का निर्देश दिया था। अदालत ने भुगतान के लिए 15 दिन की समयसीमा तय की थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुल बकाया राशि करीब 14,191 करोड़ रुपये बताई गई है। अदालत ने भुगतान होने तक बड़े पैमाने पर सरकारी विज्ञापनों पर भी रोक लगाई थी। सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
महा-हड़ताल से सेवाएं प्रभावित
27 अगस्त को बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश लेकर महा-हड़ताल में हिस्सा लिया। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, 150 से अधिक संगठनों ने इसका समर्थन किया। सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित रहा। कई जगह अस्पतालों की ओपीडी सेवाओं पर भी असर पड़ा, हालांकि आपातकालीन सेवाएं जारी रहीं। स्कूलों और अन्य सरकारी संस्थानों में भी कर्मचारियों की अनुपस्थिति का असर दिखाई दिया। लुधियाना समेत कई जिलों में लोगों को प्रमाणपत्र, राजस्व और अन्य प्रशासनिक सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। इससे सरकार पर जल्द समाधान निकालने का दबाव बढ़ा है।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगें सुनने और उनका समाधान करने के लिए तैयार है, लेकिन हड़ताल और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकती। उनका कहना है कि कर्मचारी पहले हड़ताल खत्म करें, इसके बाद बातचीत आगे बढ़ाई जा सकती है। 27 अगस्त को जालंधर में प्रस्तावित बैठक नहीं होने के बाद कर्मचारी उपायुक्त कार्यालय परिसर में एकत्र हुए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कर्मचारियों और पेंशनरों का आंदोलन सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, आंदोलन से जुड़े कर्मचारियों और पेंशनरों की संख्या लाखों में है। लंबे समय तक गतिरोध रहने पर इसका असर प्रशासनिक कामकाज के साथ राजनीतिक माहौल पर भी पड़ सकता है।