summer express, हिसार। हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों ने बकाया भुगतान जारी न होने के विरोध में मंगलवार, 1 सितंबर को सांकेतिक हड़ताल शुरू कर दी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के आह्वान पर प्रदेश के 400 से अधिक निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत कैशलेस इलाज की सेवाएं प्रभावित हुईं। इससे योजना के लाभार्थियों को निजी अस्पतालों में उपचार कराने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि सरकार की ओर से पिछले करीब छह महीने से आयुष्मान योजना का बजट जारी नहीं किया गया है। इसके चलते अस्पतालों का भुगतान लगातार लंबित होता जा रहा है। अस्पताल संचालकों के अनुसार, अकेले हिसार जिले के निजी अस्पतालों का करीब 250 करोड़ रुपये और पूरे प्रदेश के सूचीबद्ध निजी अस्पतालों का लगभग 1,200 करोड़ रुपये बकाया है।
आईएमए के हिसार जिलाध्यक्ष डॉ. गुरनीश सिंह ने बताया कि लंबे समय से भुगतान अटका होने के कारण निजी अस्पतालों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। अस्पतालों को दवाइयों की खरीद, कर्मचारियों के वेतन और रोजमर्रा के संचालन से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मुश्किल आ रही है। ऐसे में बकाया राशि जारी करवाने के लिए सांकेतिक हड़ताल का फैसला लिया गया है।
हड़ताल के चलते आयुष्मान कार्डधारकों को निजी अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा नहीं मिल रही है। गंभीर बीमारियों और सुपर स्पेशलिटी उपचार के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर मरीजों को परेशानी हो सकती है। उन्हें इलाज का खर्च स्वयं उठाना पड़ सकता है या सरकारी अस्पतालों में उपचार के लिए जाना पड़ सकता है।
हिसार जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत 40 सरकारी और 84 निजी अस्पताल सूचीबद्ध हैं। निजी अस्पतालों में सेवाएं प्रभावित होने की स्थिति में सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
हड़ताल को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सरकारी अस्पतालों और अग्रोहा मेडिकल कॉलेज को अलर्ट पर रखा है। आयुष्मान भारत योजना के जिला नोडल अधिकारी डॉ. मनीष पूनिया ने बताया कि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
डॉ. पूनिया ने निजी अस्पताल संचालकों से मरीजों के हित को प्राथमिकता देते हुए आपातकालीन सेवाएं जारी रखने और गंभीर मरीजों के इलाज में बाधा नहीं डालने की अपील की है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि हड़ताल के दौरान भी गंभीर मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जरूरी प्रबंध किए गए हैं।
निजी अस्पताल संचालकों की मुख्य मांग आयुष्मान योजना के तहत लंबे समय से लंबित भुगतान जारी करना है। उनका कहना है कि बकाया राशि का भुगतान नहीं होने तक अस्पतालों पर आर्थिक दबाव बना रहेगा। अस्पताल संचालकों ने सरकार से जल्द से जल्द लंबित भुगतान जारी कर समस्या का समाधान करने की मांग की है।