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विधानसभा में सवालों के जवाब की जगह राजनीतिक भाषण दे रही सरकार: जयराम ठाकुर

बोले- सत्ता में लौटे तो पांच साल के निर्णयों की होगी समीक्षा

शिमला, संजू-: नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर विधानसभा की कार्यप्रणाली और जनहित के मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा में विपक्ष की ओर से पूछे जा रहे सवालों का सरकार की ओर से तथ्यात्मक और स्पष्ट जवाब देने के बजाय राजनीतिक भाषण दिए जा रहे हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों को सदन में पूछे गए सवालों का जवाब तथ्यों के आधार पर देना चाहिए, लेकिन मौजूदा सरकार विधानसभा को जनसभा की तरह इस्तेमाल कर रही है।

प्रेस वार्ता के दौरान जयराम ठाकुर ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का महत्वपूर्ण मंच है, जहां जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाता है। ऐसे में यदि सवालों के जवाब देने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप किए जाएंगे तो इससे सदन की गरिमा प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में विधानसभा की ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी।

शिक्षण संस्थानों के बंद करने पर सरकार को घेरा

जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में शिक्षण संस्थानों को बंद करने और बाद में उन्हें दोबारा खोलने के मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल के दौरान उन्होंने स्थगित प्रश्न के माध्यम से प्रदेश में बंद किए गए शिक्षण संस्थानों के बारे में जानकारी मांगी थी।उनके मुताबिक, पिछली भाजपा सरकार के समय जनता, पंचायतों और जनप्रतिनिधियों की मांगों के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में स्कूल और अन्य शिक्षण संस्थान खोले गए थे। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद वर्तमान सरकार ने बड़ी संख्या में इन संस्थानों को बंद करने और उनकी अधिसूचनाएं रद्द करने का निर्णय लिया। बाद में सरकार ने इनमें से 362 संस्थानों को फिर से खोल दिया।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार से यह भी पूछा गया था कि भाजपा शासन के दौरान खोले गए कितने संस्थानों को बंद करने के बाद उसी स्थान पर दोबारा अधिसूचित किया गया। जयराम ठाकुर के अनुसार, इस प्रक्रिया में 123 ऐसे संस्थान सामने आए हैं।उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार को बाद में इन्हीं संस्थानों को दोबारा शुरू करना था तो पहले उन्हें बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थानों को बंद करने के पीछे राजनीतिक बदले की भावना भी एक कारण हो सकती है।

एक दिन में कैसे पता चला कि स्कूलों में बच्चे नहीं हैं?

जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के उस तर्क पर भी सवाल उठाया, जिसमें बंद किए गए स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम होने की बात कही जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के अगले ही दिन कई संस्थानों को बंद करने के फैसले लिए गए।उन्होंने सवाल किया कि यदि 11 दिसंबर को सरकार बनी और 12 दिसंबर से संस्थानों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो गई, तो सरकार के पास महज एक दिन में यह जानकारी कैसे पहुंच गई कि किन स्कूलों में विद्यार्थी नहीं हैं या विद्यार्थियों की संख्या बहुत कम है।उन्होंने कहा कि स्कूलों को बंद करने का निर्णय लेने से पहले सरकार को जमीनी स्तर पर वास्तविक स्थिति का अध्ययन करना चाहिए था। यदि बाद में उन्हीं संस्थानों को फिर से खोलना पड़ा, तो इससे सरकार के शुरुआती फैसलों की प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।

सदन में गलत जानकारी देने का लगाया आरोप

नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा में सरकार की ओर से दिए जा रहे जवाबों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों की ओर से कई बार ऐसे जवाब दिए जा रहे हैं, जो तथ्यों से मेल नहीं खाते।जयराम ठाकुर ने कहा कि विधानसभा में सरकार की ओर से दी गई जानकारी का महत्व बहुत अधिक होता है। यदि मुख्यमंत्री या मंत्री सदन में सही जानकारी नहीं देंगे तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के विश्वास पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ही यदि गलत जानकारी देंगे तो दूसरे जनप्रतिनिधियों के सामने भी गलत तथ्य रखने को लेकर कोई संकोच नहीं रहेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में विपक्ष के सवालों का सीधा जवाब देने के बजाय राजनीतिक बातें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा को जनसभा समझकर संबोधित करना उचित नहीं है।

कर्मचारी और पेंशनर सड़कों पर क्यों?

जयराम ठाकुर ने चौड़ा मैदान में चल रहे हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रदर्शन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जिन कर्मचारियों ने अपने जीवन का लंबा समय सरकारी सेवा में लगाया और राज्य के विकास में योगदान दिया, आज उन्हें अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठना पड़ रहा है।उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि यदि सरकार खुद को कर्मचारी और पेंशनर हितैषी बताती है तो प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार कर्मचारी और पेंशनर प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेंशनरों की 16 सूत्री मांगों में कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं और सरकार को इन पर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए।जयराम ठाकुर ने महंगाई राहत, चिकित्सा प्रतिपूर्ति और पेंशन से जुड़े लंबित मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें भी बढ़ती हैं। ऐसे में इलाज के बाद चिकित्सा प्रतिपूर्ति का भुगतान समय पर न होना उनके लिए आर्थिक परेशानी का कारण बनता है।उन्होंने हिमाचल पथ परिवहन निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई कर्मचारियों को समय पर पेंशन नहीं मिल पा रही है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के कर्मचारियों को भी कई-कई महीनों तक वेतन नहीं मिलने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

विकास की गति पर भी सरकार को घेरा

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार अपने चार साल के कार्यकाल में प्रदेश में विकास की रफ्तार को बनाए रखने में सफल नहीं रही। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के समय शुरू की गई कई योजनाओं को बंद करने या उनमें बदलाव करने का प्रयास किया गया है।

उनके मुताबिक, सरकार के पास अपने कार्यकाल की उपलब्धियों और विकास कार्यों को लेकर जनता के सामने रखने के लिए पर्याप्त ठोस मुद्दे नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य केवल पांच साल का कार्यकाल पूरा करना नजर आ रहा है।जयराम ठाकुर ने कहा कि पहले की सरकारें अपने पांच साल के कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों, योजनाओं और उपलब्धियों को चुनाव के समय जनता के सामने रखती थीं और अंतिम फैसला जनता पर छोड़ती थीं। लेकिन वर्तमान सरकार के पास विकास के मोर्चे पर बताने के लिए बहुत कम उपलब्धियां हैं।

सरकार गिराने की कोशिश नहीं, लेकिन बचाएगी भी नहीं भाजपा

प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर पूछे गए सवाल पर जयराम ठाकुर ने कहा कि राजनीति में परिस्थितियां कभी भी बदल सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार को गिराने का प्रयास नहीं कर रही है।

हालांकि उन्होंने कहा कि यदि सरकार अपनी नाकामियों और अपने फैसलों के कारण खुद संकट में आती है या गिरती है तो भाजपा उसे बचाने के लिए आगे नहीं आएगी। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारियों, पेंशनरों और आम जनता के बीच वर्तमान सरकार को लेकर भरोसा कम हुआ है।पेंशनरों की विपक्ष के साथ प्रतिबद्धता के सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल पेंशनरों का संवाद सरकार के साथ चल रहा है, लेकिन सरकार के प्रति उनका भरोसा लगभग समाप्त हो चुका है।

सत्ता में आने पर फैसलों की होगी समीक्षा

जयराम ठाकुर ने दोहराया कि यदि भाजपा भविष्य में सत्ता में आती है तो वर्तमान सरकार के पांच साल के कार्यकाल में लिए गए फैसलों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि समीक्षा का मतलब केवल जांच तक सीमित नहीं होगा, बल्कि ऐसे निर्णयों पर भी विचार किया जाएगा जो जनहित में नहीं हैं।उन्होंने कहा कि सरकार के कुछ फैसले अच्छे भी हो सकते हैं, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि कई निर्णय मित्रों और चुनिंदा लोगों के हितों को ध्यान में रखकर लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता में आने के बाद सभी फैसलों की समीक्षा करेगी और उसके बाद जनहित को ध्यान में रखते हुए आगे का निर्णय लिया जाएगा।नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार का कार्यकाल अब अंतिम चरण में है और जनता हर फैसले का हिसाब रख रही है। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा में उठाए जा रहे सवाल और प्रदेश में चल रहे कर्मचारी-पेंशनर आंदोलन सरकार के कामकाज की वास्तविक स्थिति को सामने ला रहे हैं।

Chandrika

chandrika@summerexpress.in

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