CM सुक्खू बोले— विश्वविद्यालयों में भर्ती और वित्तीय मामलों में आएगी पारदर्शिता
Summer express/शिमला, संजू-:हिमाचल प्रदेश विधानसभा में ‘हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित कर दिया गया है। विधेयक के जरिए प्रदेश के छह राज्य विश्वविद्यालयों से जुड़े कानूनों में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। नए प्रावधानों के तहत विश्वविद्यालयों के वित्तीय मामलों, नियुक्तियों, पद सृजन, पदोन्नति और वेतन-भत्तों से जुड़े फैसलों पर राज्य सरकार की निगरानी बढ़ेगी।विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार विश्वविद्यालयों में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की वित्त समिति में वित्त विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। भर्ती, नए पदों के सृजन, पदोन्नति और वेतन-भत्तों से संबंधित मामलों पर पहले वित्त समिति विचार करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती के लिए चयन समितियों का गठन किया जाएगा और निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होगा। नए संशोधनों का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।संशोधन विधेयक में कुलपति की भूमिका को भी स्पष्ट किया गया है। कुलपति विश्वविद्यालय का प्रमुख कार्यकारी और शैक्षणिक अधिकारी होगा तथा विश्वविद्यालय के समग्र कामकाज की निगरानी करेगा। आपात स्थिति में कुलपति तत्काल निर्णय ले सकेगा, लेकिन बाद में सक्षम प्राधिकारी से उसकी मंजूरी लेना आवश्यक होगा।
वहीं, कार्यकारी परिषद विश्वविद्यालय के सामान्य प्रशासन और संपत्ति से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी संभालेगी। वित्त समिति विश्वविद्यालय के बजट, खातों और ऑडिट रिपोर्ट की जांच कर कार्यकारी परिषद को सलाह देगी। वित्त समिति और कार्यकारी परिषद के बीच किसी मुद्दे पर मतभेद होने की स्थिति में मामला कुलाधिपति के पास भेजा जाएगा। राज्य सरकार से सलाह लेने के बाद कुलाधिपति का फैसला अंतिम माना जाएगा।
बढ़ते कर्ज पर पूर्व भाजपा सरकार को घेरा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश के बढ़ते कर्ज को लेकर पूर्व भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार को विकास कार्यों के लिए कर्ज लेना पड़ सकता है, लेकिन मौजूदा सरकार पर पिछली सरकार के दौरान लिए गए कर्ज को चुकाने का अतिरिक्त बोझ है।
CM सुक्खू ने कहा कि जयराम ठाकुर एक अच्छे मुख्यमंत्री हो सकते हैं, लेकिन उनके कार्यकाल में वित्त प्रबंधन ठीक नहीं रहा। मुख्यमंत्री के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश की कर्ज लेने की सीमा करीब 9 हजार करोड़ रुपये है, जबकि हर साल लगभग 11 हजार करोड़ रुपये पुराने कर्ज की अदायगी में खर्च हो रहे हैं। ऐसे में करीब 2 हजार करोड़ रुपये राज्य की ट्रेजरी से भी लगाने पड़ रहे हैं.उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार ने प्रदेश की संपदा का उचित इस्तेमाल नहीं किया और शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अपेक्षित काम नहीं हुआ। सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस सरकार प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुधारने और वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
लॉटरी और भांग की खेती के मुद्दे पर भी भाजपा पर निशाना
लॉटरी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने भाजपा के विरोध को बेवजह बताया। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी व्यक्ति पर लॉटरी खरीदने का दबाव नहीं बना रही है। जो व्यक्ति लॉटरी खरीदना चाहेगा, वही इसे खरीदेगा।भांग की खेती के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने भाजपा पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच और विचार के लिए गठित सेलेक्ट कमेटी में भाजपा के विधायक भी शामिल हैं, इसलिए इस मुद्दे को लेकर अनावश्यक राजनीति नहीं होनी चाहिए।मुख्यमंत्री ने BBMB में हिमाचल प्रदेश के अधिकारों का मुद्दा भी दोहराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने अधिकारों की लड़ाई पहले भी लड़ती रही है और आगे भी प्रदेश के हितों के लिए मजबूती से आवाज उठाती रहेगी।