Summer express/शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा का 10 दिवसीय मानसून सत्र गुरुवार को राष्ट्रीय गीत के साथ संपन्न हो गया। 21 अगस्त से 3 सितंबर तक चले इस सत्र में सदन की कार्यवाही कुल 45 घंटे 30 मिनट चली। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सत्र की समाप्ति पर आंकड़े जारी करते हुए बताया कि सदन की प्रोडक्टिविटी 91 प्रतिशत रही। उन्होंने इसे देश की उच्च उत्पादकता वाली विधानसभाओं में शामिल बताया।
786 सवालों के दिए गए जवाब
सत्र के दौरान विधायकों ने सरकार से अलग-अलग विभागों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर बड़ी संख्या में सवाल किए। विधानसभा अध्यक्ष के अनुसार सदन में कुल 514 तारांकित और 272 अतारांकित प्रश्नों के जवाब दिए गए। कई सवालों पर सदन में विस्तार से चर्चा हुई और कुछ मामलों में आधे-आधे घंटे तक चर्चा चली।
नियम 62 और 130 के तहत अहम मुद्दों पर मंथन
विधानसभा की कार्यवाही में नियम 62 के तहत 14 महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा नियम 130 के तहत स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार गारंटी जैसे मुद्दों पर भी सदस्यों ने अपने विचार रखे। इन चर्चाओं के दौरान सरकार की नीतियों और प्रदेश में चल रही योजनाओं को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी बहस भी देखने को मिली।
शून्यकाल में उठे 34 स्थानीय मुद्दे
शून्यकाल के दौरान विधायकों ने अपने विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े स्थानीय और जनहित के 34 मुद्दे सदन में उठाए। इनमें स्थानीय समस्याओं से लेकर विकास कार्यों, मूलभूत सुविधाओं और जनता से जुड़े विषय शामिल रहे। सदस्यों को क्षेत्रीय समस्याओं को सरकार के सामने रखने का मौका मिला।
11 सरकारी विधेयक सदन से पारित
मानसून सत्र के दौरान सरकार की ओर से 11 सरकारी विधेयक विधानसभा में पेश किए गए। चर्चा और प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन विधेयकों को पारित किया गया। वहीं विधानसभा की विभिन्न समितियों के 44 प्रतिवेदन भी सदन के पटल पर रखे गए। इसके साथ ही CAG की रिपोर्ट्स भी विधानसभा में प्रस्तुत की गईं।
गैर-सरकारी सदस्य दिवस और संकल्प भी रहे चर्चा में
27 अगस्त को विधानसभा में गैर-सरकारी सदस्य दिवस आयोजित किया गया। वहीं नियम 101 के तहत पांच संकल्प सदन में लाए गए। इनमें से दो संकल्पों को सदस्यों की सहमति से सर्वसम्मति से पारित किया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सत्र के दौरान सदस्यों को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त अवसर दिया गया और सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया गया।
अब विधायकों की गाड़ियों पर लगेगी आधिकारिक झंडी
सत्र के समापन पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने एक नई व्यवस्था की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब विधानसभा की ओर से विधायकों की गाड़ियों के लिए आधिकारिक झंडी उपलब्ध कराई जाएगी। इस व्यवस्था का सबसे अधिक फायदा नए विधायकों को मिलने की उम्मीद है।
अध्यक्ष के मुताबिक, आधिकारिक झंडी लगी होने से विधायकों को अलग-अलग स्थानों पर अपनी पहचान बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों और विभिन्न स्थानों पर पहचान संबंधी सुविधा मिलने की बात कही गई है।
बाइट — कुलदीप सिंह पठानिया, विधानसभा अध्यक्ष
सरकार ने गिनाईं रोजगार और विकास की उपलब्धियां
सत्र के समापन के बाद संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि मानसून सत्र में जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि सदन में कई अहम विधेयक पारित किए गए और सरकार ने जनहित से जुड़े विषयों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
विपक्ष की भूमिका पर हर्षवर्धन चौहान का निशाना
हर्षवर्धन चौहान ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए उसकी भूमिका को नकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को जनता से जुड़े मुद्दों पर रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए थी। मंत्री ने सरकार के रोजगार संबंधी आंकड़े सामने रखते हुए दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने अपने पौने चार साल के कार्यकाल में 32 हजार सरकारी नौकरियां दी हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार की ओर से अब तक 1 लाख 62 हजार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि सरकार इस साल के अंत तक 50 हजार सरकारी नौकरियां देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
गारंटियों पर सरकार का दावा—समय रहते होंगे पूरे
कांग्रेस सरकार की चुनावी गारंटियों को लेकर विपक्ष के लगातार सवालों पर भी संसदीय कार्य मंत्री ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अभी सवा साल का कार्यकाल बाकी है और इस अवधि में सभी गारंटियों को पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार अपने वादों को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही है।
जयराम ठाकुर ने सरकार पर बोला हमला
वहीं सत्र की समाप्ति के बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूरे सत्र के दौरान जल्दबाजी में नजर आई और सदन का वातावरण कई मौकों पर अफरा-तफरी जैसा रहा।
अधिकारियों को लेकर भी उठाए सवाल
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि अधिकारी भी सरकार को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्र के अंतिम दिन सदन के भीतर कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायकों को बदले की भावना से निशाना बनाया जा रहा है और उनके खिलाफ जांच तथा कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों की भूमिका इन जांचों में रही है, सत्ता में भाजपा की सरकार बनने पर उनकी भूमिका की भी जांच की जाएगी। जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
विपक्ष ने मजबूती से उठाए जनता के मुद्दे: जयराम
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से विधानसभा में उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कई सवालों का जवाब देने की स्थिति में नहीं थी। जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह सदन में जल्दबाजी में दिखाई दिए और कई मुद्दों पर विपक्ष को गुमराह करने का प्रयास किया।
विधेयकों को लेकर अदालत जाने की चेतावनी
जयराम ठाकुर ने कहा कि कुछ विधेयक विपक्ष की आपत्तियों के बावजूद सदन में पारित किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि इन विधेयकों को भविष्य में अदालत में चुनौती दी जा सकती है। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया।
सरकार के कार्यकाल पर भी साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार के करीब चार साल के कार्यकाल को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्य प्रभावित हुए हैं और स्वास्थ्य तथा शिक्षा व्यवस्था की स्थिति खराब हुई है। उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार में डूबे होने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता सरकार के कामकाज से परेशान है।
जयराम ठाकुर ने दावा किया कि मौजूदा सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और आने वाले समय में सरकार का सत्ता से जाना तय है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के दावों के बीच खत्म हुआ सत्र
इस तरह हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र आंकड़ों के लिहाज से काफी सक्रिय रहा। सरकार ने जहां 91 प्रतिशत प्रोडक्टिविटी, बड़ी संख्या में सवालों के जवाब, विधेयकों के पारित होने और रोजगार के आंकड़ों को अपनी उपलब्धि बताया, वहीं विपक्ष ने सरकार की कार्यप्रणाली, कानून-व्यवस्था, विकास और राजनीतिक प्रतिशोध जैसे मुद्दों को लेकर हमला बोला।
सत्र के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। अब विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होने के बाद सरकार और विपक्ष के दावों पर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने के आसार हैं।