Summer express/राहुल चावला, कांगड़ा -:तिब्बती धर्मगुरु और 14वें दलाई लामा शुक्रवार को अपने दो महीने से अधिक लंबे लद्दाख प्रवास के बाद धर्मशाला वापस लौट आए। दलाई लामा वायुसेना के विशेष विमान से कांगड़ा एयरपोर्ट पहुंचे। उनके आगमन की खबर मिलते ही एयरपोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में तिब्बती समुदाय के लोग और स्थानीय नागरिक उनके स्वागत के लिए जुट गए। लंबे अंतराल के बाद धर्मशाला वापसी को लेकर लोगों में खासा उत्साह और खुशी देखने को मिली।दलाई लामा के स्वागत के लिए एयरपोर्ट परिसर के बाहर विशेष तैयारियां की गई थीं। तिब्बती समुदाय के लोगों के साथ हिमाचल प्रदेश के गद्दी समुदाय के प्रतिनिधि भी पारंपरिक वेशभूषा में मौजूद रहे। गद्दी समुदाय की ओर से पारंपरिक लोक नृत्य की प्रस्तुति देकर दलाई लामा का स्वागत किया गया। इस दौरान पूरा माहौल धार्मिक आस्था और हिमाचली संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।
कांगड़ा एयरपोर्ट पहुंचने के बाद दलाई लामा कुछ समय के लिए स्वागत करने पहुंचे लोगों के बीच रहे। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था के बीच उनका काफिला मैक्लोडगंज के लिए रवाना हुआ। दलाई लामा को उनके मैक्लोडगंज स्थित निवास तक पहुंचाने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। उनके लौटने की खबर से मैक्लोडगंज और आसपास के इलाकों में भी लोगों में उत्साह देखा गया।दलाई लामा 28 जून को लद्दाख के दौरे पर गए थे। दो महीने से अधिक समय तक चले इस प्रवास के दौरान उन्होंने विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और अनुयायियों ने उनके दर्शन किए और उनके धार्मिक उपदेश सुने। लद्दाख प्रवास पूरा होने के बाद उनकी धर्मशाला वापसी का तिब्बती समुदाय लंबे समय से इंतजार कर रहा था।भारत-तिब्बत मैत्री संघ धर्मशाला के अध्यक्ष अजीत नेहरिया ने दलाई लामा की वापसी को धर्मशाला और स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दलाई लामा का धर्मशाला में रहना केवल तिब्बती समुदाय के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए विशेष महत्व रखता है। उनके वापस लौटने से लोगों में खुशी का माहौल है और उनकी मौजूदगी से धर्मशाला की रौनक एक बार फिर बढ़ेगी।
अजीत नेहरिया ने बताया कि दलाई लामा लद्दाख अपने अनुयायियों के आग्रह पर गए थे। वहां उन्होंने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और लोगों को आशीर्वाद दिया। अब उनके धर्मशाला लौटने के बाद यहां भी धार्मिक गतिविधियां दोबारा गति पकड़ेंगी।
वहीं, तिब्बती महिला संघ की अध्यक्ष त्सेरिंग डोलमा ने भी दलाई लामा की वापसी पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि तिब्बती समुदाय लंबे समय से उनके धर्मशाला लौटने की प्रतीक्षा कर रहा था। दलाई लामा की वापसी से समुदाय के लोगों में उत्साह है और उनके लौटने से धर्मशाला में सकारात्मक माहौल बना है।त्सेरिंग डोलमा ने कहा कि दलाई लामा की मौजूदगी का असर केवल तिब्बती समुदाय तक सीमित नहीं है। उनके धर्मशाला में रहने से स्थानीय कारोबारियों, होटल और पर्यटन से जुड़े लोगों के साथ-साथ टैक्सी चालकों को भी लाभ मिलता है। उनकी वापसी से धार्मिक पर्यटन और स्थानीय गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद है।
दलाई लामा की धर्मशाला वापसी के बाद अब उनके आगामी धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। छह सितंबर को मुख्य तिब्बती मंदिर में उनके शिक्षण कार्यक्रम का आयोजन प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम को लेकर अनुयायियों और तिब्बती समुदाय में पहले से ही उत्साह बना हुआ है।कुल मिलाकर, लंबे लद्दाख प्रवास के बाद दलाई लामा की धर्मशाला वापसी ने कांगड़ा से लेकर मैक्लोडगंज तक खुशी और उत्साह का माहौल बना दिया है। एयरपोर्ट पर तिब्बती और गद्दी समुदाय की ओर से किया गया स्वागत हिमाचल की सांस्कृतिक विविधता और दलाई लामा के प्रति लोगों की आस्था की झलक पेश करता नजर आया।