Summer express शिमला, संजू-: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HIMUDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने सुरेंद्र वशिष्ठ की CEO पद पर नियुक्ति को निर्धारित पात्रता और नियमों के अनुरूप नहीं माना है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार को उन्हें इस पद से हटाकर नियमों के तहत योग्य एवं पात्र अधिकारी की नियुक्ति करने के निर्देश दिए गए हैं।उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद HIMUDA में प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर एक बार फिर नियमों, योग्यता और वरिष्ठता के मानकों पर चर्चा तेज हो गई है। अदालत ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि CEO पद के लिए निर्धारित नियमों और पात्रता मानकों का पालन करते हुए योग्य अधिकारी का चयन किया जाए। सरकार को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
यह मामला HIMUDA की वरिष्ठ अधिकारी अंजोरी कपूर की ओर से उच्च न्यायालय में दायर याचिका के माध्यम से सामने आया था। याचिका में CEO पद पर सुरेंद्र वशिष्ठ की नियुक्ति की वैधता और उनके द्वारा पद संभालने की पात्रता को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से नियुक्ति से जुड़े नियमों और निर्धारित योग्यता के प्रावधानों का हवाला देते हुए अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा गया।मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष CEO पद के लिए निर्धारित पात्रता, नियुक्ति प्रक्रिया और संबंधित सेवा नियमों से जुड़े पहलुओं पर विचार किया गया। न्यायालय के आदेश के बाद अब सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि HIMUDA जैसे महत्वपूर्ण प्राधिकरण के शीर्ष प्रशासनिक पद पर नियुक्ति निर्धारित नियमों और योग्यता के आधार पर ही की जाए।
अदालत के निर्देश को प्रशासनिक व्यवस्था में नियमों की प्राथमिकता से जोड़कर देखा जा रहा है। खासतौर पर वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति से संबंधित मामलों में योग्यता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है। इस आदेश से यह संदेश भी जाता है कि सरकारी संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां केवल प्रशासनिक निर्णय के आधार पर नहीं, बल्कि लागू नियमों और पात्रता मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।अब सबकी नजरें प्रदेश सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सरकार को दो सप्ताह की तय अवधि में HIMUDA के CEO पद के लिए उपयुक्त अधिकारी की नियुक्ति को लेकर निर्णय लेना होगा। इसके लिए संबंधित सेवा नियमों, पात्रता और वरिष्ठता जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाना अपेक्षित है।हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद HIMUDA के प्रशासनिक कामकाज पर भी इसका असर पड़ना स्वाभाविक है। नए CEO की नियुक्ति होने तक सरकार को अंतरिम व्यवस्था समेत आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्णय लेना होगा।