Summer express ,राहुल चावला, धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में इको-टूरिज्म को नई दिशा देने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की योजना पर काम तेज हो गया है। धर्मशाला में 5 से 7 सितंबर तक तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है, जिसमें प्रदेश में मौजूदा इको-टूरिज्म गतिविधियों के विस्तार के साथ नई साइट्स विकसित करने पर विशेषज्ञों, अधिकारियों और आम लोगों के साथ चर्चा होगी। कार्यक्रम के आयोजन में पिंक मीडिया क्रिएशंस भी सहयोग कर रहा है।
इको-टूरिज्म सोसायटी के सीईओ एवं आईएफएस अधिकारी के. थिरुमल ने बताया कि कार्यशाला में एक दिन विशेष रूप से इको-टूरिज्म के विकास के लिए रखा गया है। इसमें वन विभाग और अन्य विभागों के अधिकारी, सोसायटी की कार्यकारिणी एवं सामान्य सदस्य, विशेषज्ञ तथा स्थानीय लोग भाग लेंगे। चर्चा के दौरान हिमाचल में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में वन विभाग के रेस्ट हाउस, पार्क, ट्रैकिंग रूट और कई प्राकृतिक स्थल मौजूद हैं। इन संसाधनों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से विकसित कर इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
के. थिरुमल के अनुसार, प्रदेश में अब तक 17 इको-टूरिज्म साइट्स आवंटित की जा चुकी हैं। इसके अलावा हाल ही में 9 नई साइट्स को अंतिम रूप दिया गया है, जिन्हें सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इनकी संख्या बढ़कर करीब 26 हो जाएगी। भविष्य में हिमाचल प्रदेश में लगभग 50 इको-टूरिज्म साइट्स विकसित कर संचालित करने की योजना है।
इको-टूरिज्म परियोजनाओं में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को भी प्राथमिकता दी जाएगी। ट्रैकिंग रूट्स पर स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड के तौर पर रोजगार देने की योजना है। वहीं इको-टूरिज्म साइट्स पर पैदा होने वाले रोजगार के करीब 80 प्रतिशत अवसर स्थानीय लोगों को उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इससे पर्यटन के साथ स्थानीय स्तर पर आय और रोजगार के नए साधन विकसित होंगे।
कार्यशाला में देश के अलग-अलग राज्यों में इको-टूरिज्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले विशेषज्ञों और संस्थाओं को भी आमंत्रित किया गया है। उनके अनुभवों और सुझावों के आधार पर हिमाचल में पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने और समुदाय आधारित इको-टूरिज्म मॉडल विकसित करने की रणनीति तैयार की जाएगी।
के. थिरुमल ने कहा कि इको-टूरिज्म के विस्तार के लिए विभागीय प्रयासों के साथ मीडिया और आम जनता की भागीदारी भी जरूरी है। कार्यशाला में आम लोगों को भी सरकारी सभागार में पहुंचकर चर्चा का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।