महिलाओं के लिए वित्तीय स्वतंत्रता की पहली सीढ़ी है अपने आर्थिक फैसलों की समझ
समर न्यूज | चंडीगढ़
हममें से बहुत-सी महिलाएं घर का बजट संभालती हैं, बच्चों की फीस से लेकर राशन और बिजली के बिल तक का हिसाब रखती हैं, नौकरी करती हैं और परिवार की जरूरतों को प्राथमिकता देती हैं। लेकिन जब बात निवेश, बीमा, कर, सेवानिवृत्ति योजना या बड़े वित्तीय फैसलों की आती है, तो अक्सर हम कह देती हैं- ‘यह सब आप देख लीजिए।’ यह कहना है मिसेज इंडिया इंटरनेशनल ग्लोबल-2026 गीतांजलि अरोड़ा का।
वह कहती हैं- यहीं से एक महत्वपूर्ण सवाल पैदा होता है- क्या आर्थिक रूप से योगदान देना ही पर्याप्त है या अपने पैसों को समझना भी उतना ही जरूरी है? मेरा मानना है कि हर महिला के लिए वित्तीय साक्षरता अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है। आर्थिक स्वतंत्रता का अर्थ केवल यह नहीं है कि महिला नौकरी करती हो या उसकी अपनी आय हो। वास्तविक स्वतंत्रता तब आती है, जब उसे पता हो कि उसकी कमाई कहां जा रही है, उसकी बचत कितनी है, परिवार की आर्थिक स्थिति क्या है और भविष्य के लिए किस तरह की योजना
बनाई गई है।
गीतांजलि कहती हैं कि कई परिवारों में निवेश और बैंकिंग से जुड़े फैसले किसी एक सदस्य द्वारा संभाले जाते हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है। समस्या तब पैदा होती है, जब परिवार के दूसरे सदस्यों को इन फैसलों की जानकारी ही न हो। हर महिला को कम-से-कम इतना जरूर पता होना चाहिए कि उसके नाम पर कौन-कौन से बैंक खाते हैं, कितनी बचत है, कौन-सी बीमा पॉलिसियां हैं, निवेश कहां किया गया है और परिवार की महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारी कहां उपलब्ध है। जानकारी किसी पर अविश्वास नहीं है, बल्कि अपने भविष्य के प्रति जिम्मेदारी है।
{शुरुआत छोटी हो सकती है: वित्तीय साक्षरता का अर्थ यह नहीं है कि हर महिला को शेयर बाजार की विशेषज्ञ बनना पड़े। इसकी शुरुआत बहुत सामान्य चीजों से की जा सकती है- बजट बनाना, बचत का लक्ष्य तय करना, बैंक स्टेटमेंट पढ़ना, ब्याज की गणना समझना और यह जानना कि सावधि जमा (एफडी), सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ), म्यूचुअल फंड, बीमा और पेंशन जैसी वित्तीय व्यवस्थाएं किस तरह काम करती हैं। इसके बाद धीरे-धीरे निवेश और कर से जुड़ी बुनियादी जानकारी हासिल की जा सकती है। आज इंटरनेट पर जानकारी की कमी नहीं है, लेकिन हर जानकारी सही या सभी के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं। इसलिए किसी वित्तीय निर्णय से पहले विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लेना और आवश्यकता पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाह लेना भी महत्वपूर्ण है।
{हर महिला के पास हो ‘आर्थिक सुरक्षा की चाबी’: गीतांजलि के अनुसार हर महिला को कम-से-कम कुछ बुनियादी वित्तीय सुरक्षा अपने स्तर पर सुनिश्चित करनी चाहिए।
-पहला: आपातकालीन बचत। अचानक नौकरी जाने, बीमारी, परिवार में किसी आपात स्थिति या किसी अप्रत्याशित खर्च के समय छोटी-सी बचत भी बड़ा सहारा बन सकती है।
-दूसरा: बीमा की समझ। बीमा को निवेश या केवल कर बचाने का साधन मानना सही दृष्टिकोण नहीं है। जीवन और स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों के लिए पर्याप्त सुरक्षा क्यों और कितनी जरूरी है, इसे समझना चाहिए।
-तीसरा: निवेश में विविधता। अपनी सारी बचत एक ही जगह रखना हमेशा उचित नहीं होता। अपने वित्तीय लक्ष्यों, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार अलग-अलग विकल्पों को समझना जरूरी है।
-चौथा: सेवानिवृत्ति की योजना। महिलाएं अक्सर परिवार की वर्तमान जरूरतों को भविष्य की जरूरतों से ऊपर रख देती हैं। लेकिन आर्थिक रूप से सुरक्षित भविष्य की योजना जितनी जल्दी शुरू की जाए, उतना बेहतर होता है।
-पांचवां: डिजिटल वित्तीय सुरक्षा। आज बैंकिंग और निवेश का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन है। ओटीपी, पिन और पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी साझा न करना, संदिग्ध लिंक से बचना और डिजिटल धोखाधड़ी के प्रति जागरूक रहना भी वित्तीय साक्षरता का हिस्सा है।
{‘मेरे पति संभाल लेते हैं’ पर्याप्त जवाब नहीं: हमारे समाज में यह वाक्य सामान्य है-‘मेरे पति सारे पैसे देखते हैं।’ पति-पत्नी के बीच विश्वास होना अच्छी बात है, लेकिन विश्वास और जानकारी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। इसी तरह बेटियों को भी केवल इसलिए वित्तीय मामलों से दूर नहीं रहना चाहिए कि ‘‘पापा सब संभाल रहे हैं।’’ परिवार में आर्थिक जिम्मेदारियां साझा हो सकती हैं, लेकिन वित्तीय समझ भी साझा होनी चाहिए। किसी भी परिवार में परिस्थितियां कभी भी बदल सकती हैं। ऐसे समय में वित्तीय जानकारी रखने वाला व्यक्ति ही अधिक आत्मविश्वास के साथ जरूरी फैसले ले सकता है।
{निवेश से डरने के बजाय सीखने की जरूरत: कई महिलाएं निवेश को जटिल समझकर उससे दूरी बनाए रखती हैं। दूसरी ओर, कुछ महिलाएं बिना पूरी जानकारी के किसी परिचित, रिश्तेदार या सोशल मीडिया पर मिली सलाह के आधार पर निवेश कर देती हैं। दोनों स्थितियों से बचना जरूरी है। हमें किसी के कहने पर पैसा लगाने के बजाय सवाल पूछने की आदत डालनी चाहिए—इसमें जोखिम कितना है? पैसा कितने समय के लिए लगाना है? रिटर्न की कोई गारंटी है या नहीं? इससे जुड़े शुल्क क्या हैं? अगर अचानक पैसे की जरूरत पड़ जाए तो क्या होगा? सवाल पूछना वित्तीय समझ की शुरुआत है।
आर्थिक रूप से जागरूक महिला, आर्थिक रूप से मजबूत परिवार: गीतांजलि का मानना है कि जब कोई महिला वित्तीय रूप से जागरूक होती है, तो इसका लाभ केवल उसे ही नहीं मिलता। वह बच्चों को बचत की आदत सिखा सकती है, परिवार के बड़े आर्थिक फैसलों में बेहतर योगदान दे सकती है और मुश्किल समय में अधिक आत्मविश्वास के साथ खड़ी हो सकती है। इसलिए महिला सशक्तीकरण की चर्चा में वित्तीय साक्षरता को भी केंद्र में रखना होगा। हमें अपनी बेटियों को केवल अच्छी शिक्षा हासिल करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें यह भी सिखाना चाहिए कि वे अपनी मेहनत की कमाई को समझें, उसका सम्मान करें और उसके भविष्य की योजना बनाएं। आखिरकार, आर्थिक स्वतंत्रता का सबसे मजबूत आधार केवल बड़ी कमाई नहीं, बल्कि सही जानकारी और सही निर्णय लेने का आत्मविश्वास है। हर महिला को अपने पैसों के बारे में इतना जरूर पता होना चाहिए कि अगर कभी जीवन में उसे अकेले कोई आर्थिक निर्णय लेना पड़े, तो वह डर के बजाय आत्मविश्वास के साथ कह सके- ‘मैं इसे समझती हूं और यह निर्णय ले सकती हूं।’