Summer express, मोनिका रावत , चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्ति लाभ में अनावश्यक देरी को लेकर पंजाब सरकार को अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी की पेंशन और ग्रेच्युटी की राशि बिना उचित कारण लंबे समय तक रोके रखना उचित नहीं है। हाई कोर्ट ने पंजाब पुलिस के सेवानिवृत्त कर्मचारी बलविंदर सिंह को देरी से जारी किए गए पेंशन बकाया और ग्रेच्युटी पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया है। यह ब्याज 20 जून 2018 से वास्तविक भुगतान की तारीख तक देना होगा। अदालत ने सरकार को दो माह के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है।
मामला अमृतसर के रहने वाले बलविंदर सिंह से जुड़ा है, जो 11 जून 1982 को पंजाब पुलिस में सिपाही के पद पर नियुक्त हुए थे। सेवा के दौरान उन्हें हेड कांस्टेबल और फिर सहायक उपनिरीक्षक के पद पर पदोन्नति मिली थी। वह 31 दिसंबर 2017 को सेवानिवृत्त होने वाले थे। लेकिन सेवानिवृत्ति से महज 14 दिन पहले 18 दिसंबर 2017 को गुरु नानक देव अस्पताल, अमृतसर में पुलिस हिरासत से एक आरोपित के फरार होने के मामले में उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ और 22 दिसंबर 2017 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। बलविंदर सिंह ने बर्खास्तगी के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर की। 19 अप्रैल 2018 को पुलिस विभाग ने उनकी पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें 22 दिसंबर 2017 से ही सेवा में बहाल करने का आदेश दिया और सभी परिणामी लाभ देने की बात कही। हालांकि उनकी आयु पूरी हो चुकी थी, इसलिए उन्हें 31 दिसंबर 2017 से सेवानिवृत्त माना गया। विभागीय जांच में भी उन्हें निर्दोष पाया गया।
बाद में 24 सितंबर 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने भी उन्हें आपराधिक मामले में बरी कर दिया। विभाग ने अंतरिम पेंशन, अवकाश नकदीकरण और भविष्य निधि की राशि तो जारी कर दी, लेकिन 3,81,569 रुपये के पेंशन बकाया और 10 लाख रुपये की ग्रेच्युटी का भुगतान 1 नवंबर 2021 को किया गया। यानी बहाली के आदेश के बाद इन रकमों के भुगतान में तीन साल छह माह से अधिक की देरी हुई। सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि आपराधिक मामला लंबित होने के कारण भुगतान में देरी हुई और यह जानबूझकर नहीं की गई थी। जस्टिस नामित कुमार ने कहा कि जब कर्मचारी को बर्खास्तगी की तारीख से ही बहाल कर दिया गया था और उसे सेवानिवृत्त भी माना गया, तो उसके सेवानिवृत्ति लाभ उचित समय में जारी किए जाने चाहिए थे। अदालत ने पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारी को पेंशन और अन्य लाभ समय पर मिलना उसका अधिकार है। सामान्य तौर पर सेवानिवृत्ति के दो माह के भीतर भुगतान किया जाना चाहिए। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने 20 जून 2018 से ब्याज देने का आदेश दिया।