summer express , राकेश कुमार शर्मा, करनाल। सब्जियों के भाव गिरने पर किसानों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए नीलोखेड़ी फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPO) ने वैल्यू एडिशन की दिशा में पहल शुरू की है। FPO की ओर से ऐसी मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे प्याज, करेला और भिंडी जैसी सब्जियों को ड्राई कर लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। तैयार उत्पाद को बाजार में बेचने के साथ देश-विदेश में सप्लाई करने की भी तैयारी की जा रही है।
करनाल और हरियाणा में बड़े स्तर पर सब्जियों की खेती होती है। कई बार उत्पादन अधिक होने पर प्याज, करेला, भिंडी समेत कई सब्जियों के भाव अचानक नीचे आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में किसानों को कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ती है या समय पर बिक्री न होने पर फसल खराब होने का खतरा रहता है। FPO की पहल के तहत किसानों को फसल की तत्काल बिक्री के बजाय उसे प्रोसेस कर सुरक्षित रखने का विकल्प देने का प्रयास किया जा रहा है।
नीलोखेड़ी FPO ने सबसे पहले प्याज को ड्राई करने से शुरुआत की। इसके बाद करेले को शामिल किया गया और अब भिंडी को भी ड्राई कर बाजार में उतारने की तैयारी है। FPO का उद्देश्य केवल सब्जियों की शेल्फ लाइफ बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें वैल्यू एडेड प्रोडक्ट के रूप में तैयार कर बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।
FPO के फार्मर प्रोड्यूसर सरदार सिंह के मुताबिक, मशीन पर होने वाले खर्च के बाद ड्राई सब्जियों की बिक्री से किसानों को ताजी सब्जियों की तुलना में बेहतर कीमत मिल सकती है। उनका दावा है कि सही बाजार मिलने पर ड्राई सब्जियों से सामान्य ताजी सब्जियों के मुकाबले 8 से 10 गुना तक अधिक मुनाफा हासिल किया जा सकता है। FPO इन उत्पादों को निर्यात बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी काम कर रहा है।
किसानों की जरूरत के अनुसार अलग-अलग क्षमता की मशीनें उपलब्ध हैं। करीब 35 हजार रुपये की छोटी मशीन में किसान सब्जियों की धुलाई के बाद उन्हें ड्राई कर सकता है। वहीं करीब 50 लाख रुपये की लागत वाला बड़ा यूनिट 4 से 5 किसान मिलकर भी स्थापित कर सकते हैं। बड़े यूनिट में सब्जियों की सफाई, धुलाई और ड्राई करने की प्रक्रिया मशीन के जरिए की जा सकती है। इसके बाद तैयार उत्पाद को वजन के अनुसार पैक कर बाजार में बिक्री या निर्यात के लिए भेजा जा सकता है।
FPO का कहना है कि सब्जियों के भाव कम होने के दौरान यह तकनीक किसानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बन सकती है। इससे फसल की बर्बादी कम करने, बिक्री के लिए अतिरिक्त समय हासिल करने और उत्पाद को बेहतर बाजार में बेचने की संभावना बढ़ेगी।
सरदार सिंह ने बताया कि फिलहाल इस तकनीक और मशीन पर सरकार की ओर से सब्सिडी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सरकार से किसानों को आर्थिक सहायता और सब्सिडी देने की मांग की, ताकि अधिक से अधिक किसान इस तकनीक को अपना सकें। FPO के अनुसार, खेत से सीधे कच्ची सब्जी बेचने के बजाय उसे प्रोसेस कर वैल्यू एडेड प्रोडक्ट में बदलना किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा कर सकता है।