summer express , मोनिका रावत , चंडीगढ़। हरियाणा में एमएसएमई के लिए कारोबार शुरू करने और मौजूदा विनिर्माण इकाइयों का विस्तार करने की प्रक्रिया अब समयबद्ध होगी। हरियाणा राइट टू बिजनेस एक्ट, 2026 लागू हो गया है। इसके तहत जिला स्तर पर आवेदन पर 15 कार्यदिवस में फैसला करना होगा। इस अवधि में मंजूरी या अस्वीकृति नहीं मिली तो आवेदन अपने आप राज्य स्तर पर चला जाएगा।
वहां भी 10 कार्यदिवस में फैसला नहीं हुआ तो इन-प्रिंसिपल अप्रूवल को स्वत: मंजूर माना जाएगा। यानी सामान्य स्थिति में आवेदन पर अधिकतम 25 कार्यदिवस में फैसला होना है। डीम्ड अप्रूवल की स्थिति में जिला नोडल एजेंसी को तीन दिन के भीतर प्रमाणपत्र जारी करना होगा। इस संदर्भ में सरकार ने नोटिफिकेशन लागू कर दिया है। अधिसूचना जारी होते ही इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है।
यह सुविधा हर कारोबार को नहीं मिलेगी। इसका लाभ उन पंजीकृत एमएसएमई को मिलेगा जो नई विनिर्माण इकाई स्थापित करना चाहते हैं या मौजूदा विनिर्माण इकाई का विस्तार करना चाहते हैं। इकाई का केंद्र सरकार के उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत होना जरूरी है। उद्यमी को सबसे पहले जिला नोडल एजेंसी के पास ‘डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट’ देना होगा। इसके बाद आवेदन की प्रक्रिया शुरू होगी।
पहला पड़ाव जिला स्तर है। जिला नोडल एजेंसी को 15 कार्यदिवस के भीतर इन-प्रिंसिपल अप्रूवल जारी करना होगा या आवेदन खारिज करना होगा। 15 दिन में फैसला नहीं हुआ तो दूसरा पड़ाव राज्य स्तर है। आवेदन हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर के डिप्टी चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के पास जाएगा। वहां 10 कार्यदिवस में फैसला करना होगा। यहां भी 10 दिन बीत गए और फैसला नहीं हुआ तो तीसरा रास्ता खुलेगा, डीम्ड अप्रूवल। इसके बाद आवेदन मंजूर माना जाएगा और जिला नोडल एजेंसी तीन दिन में प्रमाणपत्र जारी करेगी।
अप्रूवल के बाद तीन साल तक सामान्य निरीक्षण नहीं
इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिलने के बाद एमएसएमई को 36 महीने यानी तीन साल की मोराटोरियम अवधि मिलेगी। इस दौरान इकाई का सामान्य निरीक्षण नहीं किया जा सकेगा और सामान्य आधार पर जबरन कार्रवाई भी नहीं होगी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि तीन साल तक सरकार किसी भी स्थिति में जांच नहीं कर सकेगी। यदि किसी इकाई के खिलाफ शिकायत मिलती है तो निरीक्षण किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित सक्षम प्राधिकरण के प्रमुख को निरीक्षण का कारण लिखित रूप में दर्ज करना होगा। निरीक्षण संयुक्त निदेशक या उससे ऊपर के अधिकारी से कराया जाएगा और जिला नोडल एजेंसी के अध्यक्ष को इसकी पूर्व सूचना देनी होगी।
तीन साल में बाकी मंजूरियां लेना जरूरी
यहां कानून की सबसे महत्वपूर्ण शर्त है। इन-प्रिंसिपल अप्रूवल अंतिम मंजूरियों का विकल्प नहीं है। उद्यमी को जिन वैधानिक मंजूरियों की जरूरत है, उनकी प्रक्रिया तीन साल की अवधि में पूरी करनी होगी। इसके लिए इन्वेस्ट हरियाणा सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। इतना ही नहीं, मोराटोरियम खत्म होने से पहले अंतिम छह महीनों में सभी लंबित मंजूरियां हासिल करना अनिवार्य होगा। इसका सीधा अर्थ है कि सरकार ने शुरुआती मंजूरी और निरीक्षण प्रक्रिया को आसान किया है, लेकिन जमीन, निर्माण, अग्नि सुरक्षा, प्रदूषण और दूसरी वैधानिक मंजूरियों को खत्म नहीं किया है।
जमीन या भवन नियम तोड़ने पर कार्रवाई होगी
इन-प्रिंसिपल अप्रूवल के आधार पर उद्यमी निर्धारित भू-उपयोग के विपरीत जमीन का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। अनधिकृत निर्माण, जमीन के गलत इस्तेमाल, भवन की संरचनात्मक मजबूती, अग्नि सुरक्षा या सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में सक्षम प्राधिकरण निरीक्षण का आदेश दे सकेगा। ऐसे निरीक्षण की रिपोर्ट 48 घंटे के भीतर ऑनलाइन उपलब्ध कराना जरूरी होगा। अगर उद्यमी ने आवेदन में गलत या फर्जी जानकारी दी, कोई तथ्य छिपाया या कानून का उल्लंघन किया तो जिला नोडल एजेंसी सुनवाई का मौका देने के बाद इन-प्रिंसिपल अप्रूवल वापस ले सकती है। तीन साल की अवधि में जरूरी मंजूरियां नहीं लेने पर मोराटोरियम खत्म होने के बाद संबंधित विभाग कानूनी कार्रवाई कर सकेंगे।
कई विभागों की मंजूरियां कानून के दायरे में
कानून में उन मंजूरियों और विभागों की सूची भी दी गई है जिन पर यह व्यवस्था लागू होगी। इनमें औद्योगिक क्षेत्र में भू-उपयोग परिवर्तन, शहरी क्षेत्र से संबंधित एनओसी, कम जोखिम वाले उद्योगों के भवन नक्शे की मंजूरी, स्थानीय निकायों की मंजूरियां, फायर फाइटिंग स्कीम और फायर एनओसी शामिल हैं। इसके अलावा हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थापना और संचालन संबंधी सहमति, एचएसआईआईडीसी की भवन योजना मंजूरी व प्लिंथ लेवल प्रमाणपत्र तथा श्रम विभाग का दुकान पंजीकरण भी इसके दायरे में है।
मंजूरी खारिज हुई तो अपील का रास्ता
जिला स्तर पर आवेदन खारिज होने पर उद्यमी 30 दिन के भीतर राज्य नोडल एजेंसी के समक्ष अपील कर सकता है। राज्य स्तर पर अस्वीकृति के खिलाफ भी 30 दिन में हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पास अपील की जा सकेगी। जिला स्तरीय क्लीयरेंस कमेटी को जिला नोडल एजेंसी और हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन एक्ट, 2016 के तहत गठित एम्पावर्ड एग्जीक्यूटिव कमेटी को राज्य नोडल एजेंसी बनाया गया है।
सीधी बात : कानून से उद्यमी को क्या मिला
पहला – शुरुआती मंजूरी के लिए निश्चित समय-सीमा। दूसरा – 25 कार्यदिवस में फैसला नहीं हुआ तो डीम्ड अप्रूवल। तीसरा – अप्रूवल मिलने के बाद तीन साल तक सामान्य निरीक्षण से सुरक्षा। लेकिन – जमीन, भवन, फायर सेफ्टी, प्रदूषण और दूसरी वैधानिक मंजूरियां खत्म नहीं हुईं। इन्हें तीन साल के भीतर हासिल करना होगा।