summer express ,नई दिल्ली। शहरों का विकास केवल बहुमंजिली इमारतों और बढ़ते निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए। आबादी और निर्माण क्षेत्र बढ़ने के साथ सड़कों, सीवर, जल निकासी, पार्किंग और सार्वजनिक परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु में तेजी से हो रहे शहरीकरण से जुड़ी सुनवाई के दौरान गुरुग्राम और ग्रेटर नोएडा का उदाहरण देते हुए सुनियोजित विकास की जरूरत पर जोर दिया।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने मंगलवार को कहा कि गुरुग्राम में बारिश या प्राकृतिक आपदा के दौरान व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि शहर में प्लॉट और बहुमंजिली इमारतों की संख्या तो तेजी से बढ़ी, लेकिन इसके अनुरूप ड्रेनेज, सीवेज और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास पर पर्याप्त निवेश नहीं हुआ।
इसके विपरीत सीजेआई ने ग्रेटर नोएडा का उदाहरण देते हुए कहा कि इस शहर को अगले 30 से 40 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया गया था। कोर्ट की टिप्पणी से स्पष्ट है कि शहरी विस्तार के साथ भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधारभूत ढांचे की योजना बनाना भी आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जिसमें राज्य सरकार की प्रीमियम फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) योजना को बरकरार रखा गया था। सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता सिटिजंस एक्शन फोरम की याचिका पर नोटिस जारी किया।
हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त एफएआर का इस्तेमाल किसी भी अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
प्रीमियम एफएआर योजना के तहत संपत्ति मालिक निर्धारित प्रीमियम का भुगतान कर सामान्य रूप से स्वीकृत एफएआर से अधिक निर्माण अधिकार प्राप्त कर सकते हैं। इसका उद्देश्य शहरों में ऊंचाई की ओर विकास को बढ़ावा देना और शहरी निकायों के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना है।
एफएआर यानी फ्लोर एरिया रेश्यो किसी भूखंड के क्षेत्रफल और उस पर बनाए जा सकने वाले कुल फ्लोर एरिया के बीच का अनुपात होता है। एफएआर बढ़ने पर एक ही भूखंड पर अधिक निर्माण क्षेत्र की अनुमति मिल सकती है।