बिलासपुर, सुभाष-: जिले की पंचायतों में कर्मचारियों की कमी का असर विकास कार्यों पर पड़ने लगा है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं होने के कारण कई विकास कार्य निर्धारित समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। इससे पंचायतों को उपलब्ध बजट का समय पर उपयोग करने में दिक्कत आ रही है और कई बार राशि खर्च न होने के कारण वापस जाने की स्थिति बन रही है।कपाहड़ा पंचायत के प्रधान विनय कुमार ने प्रदेश सरकार से पंचायतों में आवश्यकतानुसार कर्मचारियों की नियुक्ति करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि पंचायतों में पर्याप्त स्टाफ होने से विकास कार्यों को समय पर पूरा करने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का लाभ भी लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंचाया जा सकता है।
प्रधान ने पंचायतों में कांच और प्लास्टिक की बोतलों के संग्रहण के लिए उपलब्ध करवाई जा रही गाड़ियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई बार संबंधित वाहन घर-घर से कचरा एकत्रित करने के बजाय एक ही स्थान से कचरा उठाकर लौट जाता है। इसके बावजूद एक पंचायत से वाहन के लिए करीब 10 हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है।विनय कुमार ने बताया कि कपाहड़ा पंचायत ने फिलहाल इस व्यवस्था का विरोध करते हुए उक्त वाहन की सेवा नहीं लेने का निर्णय लिया है। पंचायत अपने स्तर पर जल्द ही एक व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपेगी, जो घर-घर जाकर कांच और प्लास्टिक की बोतलें एकत्रित करेगा।उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि यदि किसी स्थान पर कचरा संग्रहण व्यवस्था में नियमों की अनदेखी हो रही है तो उसकी जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि पंचायतों को उपलब्ध करवाए जा रहे संसाधनों और बजट का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिले और लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।