Summer express, शिमला, संजू। हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की तस्वीर पोस्टर और होर्डिंग में नहीं लगाए जाने को लेकर चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पोस्टर में फोटो हो या न हो, राजा साहब जनता के दिलों में बसते हैं। उन्होंने वीरभद्र सिंह के नाम पर नई राजनीतिक पार्टी बनाने की चर्चाओं का भी विरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने सांसद कंगना रणौत के हिमाचल प्रदेश को लेकर दिए गए बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अपने ही राज्य को छोटा आंकना गलत है।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह युग पुरुष और प्रदेश के कद्दावर नेता थे। किसी पोस्टर या होर्डिंग पर उनकी तस्वीर लगने या न लगने से उनकी लोकप्रियता पर कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने अपने कार्यों और योगदान से प्रदेश की जनता के दिलों में जगह बनाई थी। हिमाचल प्रदेश के निर्माण और विकास में डॉ. वाईएस परमार, ठाकुर रामलाल और वीरभद्र सिंह जैसे नेताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह परिवार में बुजुर्गों का सम्मान किया जाता है, उसी तरह राजनीतिक दलों में भी पूर्व नेताओं के योगदान और उनकी विरासत का आदर होना चाहिए। किसी नेता का कद पोस्टर पर लगी तस्वीर से नहीं, बल्कि उसके कार्यों से तय होता है।
वीरभद्र सिंह के नाम पर नई पार्टी बनाने की चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी को भी राजनीतिक दल बनाने का अधिकार है, लेकिन दिवंगत नेता के नाम का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। वीरभद्र सिंह ने अपना पूरा जीवन कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने में लगाया था। ऐसे में उनके नाम पर नई पार्टी बनाने की किसी भी कोशिश का वह विरोध करेंगे।
सांसद कंगना रणौत के हिमाचल प्रदेश को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विक्रमादित्य सिंह ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का मजबूत और अभिन्न अंग है। शिक्षा, प्रति व्यक्ति आय और विकास के क्षेत्र में प्रदेश ने अपनी अलग पहचान बनाई है। राजनीतिक विचारधारा अलग-अलग हो सकती है, लेकिन अपने ही राज्य को छोटा आंकना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक मंचों पर बयान देते समय अपनी भाषा और शब्दों का ध्यान रखना चाहिए।
वहीं, प्रदेश के ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण के दूसरे फेज में करीब 3,000 करोड़ रुपये की लागत से 340 सड़कों के निर्माण को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इन सड़कों की कुल लंबाई 1,659 किलोमीटर प्रस्तावित है। लोक निर्माण मंत्री ने बताया कि इस संबंध में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से बातचीत हुई है। अक्टूबर-नवंबर में मंजूरी मिलने की उम्मीद है, जबकि जनवरी से निर्माण कार्य शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा करीब 128 करोड़ रुपये की लागत से 23 पुलों को भी जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इन पुलों के निर्माण से बरसात के दौरान नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने के कारण प्रभावित होने वाले यातायात को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
विक्रमादित्य सिंह के अनुसार, पिछले चार वर्षों में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में सड़क निर्माण, अमृत योजना, स्वच्छता, सीवरेज और पेयजल परियोजनाओं के लिए करीब 9,500 से 10,000 करोड़ रुपये लाने में सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि सड़कों के रखरखाव के लिए 800 करोड़ रुपये की वार्षिक योजना पर काम किया जा रहा है। इसके तहत करीब 800 किलोमीटर सड़कों के रखरखाव का लक्ष्य रखा गया है।
मंत्री ने कहा कि बिटुमेन की कमी के कारण सड़क निर्माण और मरम्मत के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इस समस्या को लेकर वह केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात करेंगे। उन्होंने प्रदेश के लोगों से सड़क निर्माण के लिए भूमि की गिफ्ट डीड करने और वन अधिकार अधिनियम (FRA) तथा वन संरक्षण अधिनियम (FCA) से संबंधित मंजूरियां दिलाने में सहयोग करने की अपील की, ताकि विकास कार्यों को समय पर पूरा किया जा सके।