समर न्यूज | चंडीगढ़
हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट सोसायटी में हुए 700 करोड़ रुपये से अधिक के महाघोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सोमवार को जांच एजेंसी ने इस धोखाधड़ी मामले में चार और अहम आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सेक्टर-35 के बर्तन कारोबारी गौरव कांसल, सिद्धार्थ नरूला, मोहित और मनोज शामिल हैं। इन चारों को पंचकूला की सीबीआई अदालत में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने आगे की पूछताछ और सुबूत जुटाने के लिए उन्हें तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। सीबीआई की अब तक की जांच के अनुसार, इस पूरे घोटाले का कथित मास्टरमाइंड आइडीएफसी फर्स्ट बैंक का पूर्व ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि है। गिरफ्तार किया गया गौरव कांसल इस आपराधिक नेटवर्क में ‘कैश कनवर्टर’ के रूप में काम करता था। उसका मुख्य काम सरकारी खातों से अवैध तरीके से निकाली गई करोड़ों की रकम को नकदी (कैश) में बदलना और उसे ठिकाने लगाना था। जांच में सामने आया है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान गौरव ने 140 से अधिक लेन-देन के जरिए रिभव ऋषि के साथ मिलकर करीब 94 करोड़ रुपये ठिकाने लगाए। घोटालेबाजों ने एक संगठित गिरोह की तरह काम करते हुए आरएस ट्रेडर्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स जैसी कई फर्जी कंपनियों के जरिए करोड़ों का लेन-देन किया, ताकि अंतिम लाभार्थियों का पता लगाना मुश्किल हो जाए। इस मामले का सबसे सनसनीखेज और बड़ा खुलासा कालका नगर परिषद के फंड से जुड़ा है। 20 जनवरी 2026 को एमसी कालका के खाते से 18.46 करोड़ रुपये उड़ाए गए थे। जांच में पाया गया कि इसमें से 2 करोड़ रुपये की रकम हवाला नेटवर्क के जरिए महज 48 घंटे के भीतर दिल्ली में बैठे एक आरोपित आइएएस अधिकारी आरके सिंह के बेटे तक पहुंचाई गई। इस काम में मोहित गोयल ने अहम भूमिका निभाई थी, जिसने रिभव के कहने पर नकदी का इंतजाम किया था।