Summer express, राकेश कुमार शर्मा, करनाल। हरियाणा की मंडियों में धान की खरीद में देरी और नमी के नाम पर फसल के दामों में कटौती किए जाने के आरोपों को लेकर किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर किसानों ने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। इसी कड़ी में करनाल अनाज मंडी स्थित मार्केट कमेटी कार्यालय के बाहर किसानों ने धरना देकर तालाबंदी की और सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। किसान संगठनों का आरोप है कि खरीद प्रक्रिया सुचारू नहीं होने के कारण किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
भारतीय किसान यूनियन के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने आरोप लगाया कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान खरीदने से बचने के लिए नमी का बहाना बना रही है। उन्होंने कहा कि धान में निर्धारित सीमा से अधिक नमी बताकर किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं दिया जा रहा। इसी के विरोध में किसान मार्केट कमेटी कार्यालयों पर तालाबंदी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय पर खरीद सुनिश्चित की जाती तो किसानों को विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।
रतन मान ने आरोप लगाया कि किसानों को कम कीमत पर धान बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने सत्ता में बैठे लोगों, अधिकारियों और व्यापारियों की कथित मिलीभगत पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी खरीद व्यवस्था का लाभ किसानों तक नहीं पहुंच रहा है। उनका कहना था कि यदि सरकार एमएसपी पर खरीद को लेकर गंभीर है तो मंडियों में खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से क्यों नहीं चल रही।
किसान नेता ने दावा किया कि मंडियों में नमी का हवाला देकर धान के भाव में 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक की कटौती की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से 22 सितंबर से धान खरीद शुरू करने की बात कही गई थी, लेकिन किसानों को जमीनी स्तर पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, एमएसपी से कम कीमत मिलने की शिकायतों के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाने की आशंका है।
रतन मान ने पंजाब में किसानों के हितों को लेकर किए जा रहे दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा की मंडियों में किसान अपनी फसल बेचने के लिए परेशान हैं और खरीद में देरी से उनमें निराशा बढ़ रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की।
किसान नेता ने धान के भंडारण और उठान व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि खरीद में देरी के बीच सरकार भंडारण की व्यवस्था तलाशने की बात कर रही है, जबकि मंडियों में फसल खराब होने का खतरा बढ़ रहा है। इससे किसानों को नुकसान हो सकता है। रतन मान ने चेतावनी दी कि यदि खरीद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिला तो किसान संगठन आंदोलन को और तेज करने के लिए अगली रणनीति बनाएंगे।
गौरतलब है कि 12 अक्टूबर को नरवाना में किसान संगठनों की बैठक में मंडियों में तालाबंदी का फैसला लिया गया था। इसी निर्णय के तहत करनाल में मार्केट कमेटी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया। किसानों ने मांग की कि धान की खरीद समय पर सुनिश्चित की जाए और उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य मिले।