भाजपा में पांच गुट होने का आरोप, ईवीएम पर संदेह दूर करने के लिए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की पैरवी
Summer express/शिमला , संजू-: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन के बयानों पर पलटवार करते हुए भाजपा में गुटबाजी होने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर्ष महाजन उनसे बाद में राजनीति में आए थे और वह उनसे पहले ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी तथा एनएसयूआई के अध्यक्ष बन चुके थे। सुक्खू ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी पांच गुटों में बंटी हुई है और उसके नेता अलग-अलग जगहों पर जाकर मुख्यमंत्री पद को लेकर तरह-तरह के बयान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं की वापसी की संभावनाओं को भी खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस ऐसे नेताओं को वापस नहीं लेना चाहती। जिन नेताओं को पार्टी छोड़कर जाना है, वे भी जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हर्ष महाजन के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा के भीतर नेतृत्व को लेकर अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा कि हर्ष महाजन उनसे बाद में राजनीति में आए थे, जबकि वह उनसे पहले ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी और एनएसयूआई के अध्यक्ष बन चुके थे। मुख्यमंत्री ने भाजपा में गुटबाजी का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी के नेता अलग-अलग स्थानों पर जाकर कभी किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाने की बात करते हैं, तो कभी किसी दूसरे नेता का नाम लेते हैं। उनके मुताबिक, भाजपा के भीतर ही नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति दिखाई दे रही है।
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं की वापसी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने दोटूक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ऐसे नेताओं को वापस लेने की इच्छुक नहीं है। इसलिए उनकी वापसी को लेकर चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं है। सुक्खू ने पार्टी छोड़ने के इच्छुक नेताओं को भी स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जिसने और जाना है, वह भी चला जाए। मुख्यमंत्री के इस बयान को प्रदेश की राजनीति में दल बदल और नेताओं की वापसी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अहम माना जा रहा है।
वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण पर दी सफाई
पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों पर भी मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के बड़े नेता रहे हैं और प्रदेश के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में उनकी प्रतिमा का अनावरण उनके प्रति सम्मान और श्रद्धा प्रकट करने का अवसर है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस कार्यक्रम में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और पार्टी के कई अन्य नेता मौजूद थे।सुक्खू ने कहा कि वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण को कांग्रेस के भीतर गुटबाजी से जोड़कर देखना उचित नहीं है। उन्होंने अपनी अनुपस्थिति को लेकर भी सफाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह दिल्ली में होने के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। उनकी गैरमौजूदगी को पार्टी के भीतर किसी तरह की खींचतान या राजनीतिक मतभेद से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने इस कार्यक्रम को वीरभद्र सिंह के प्रति सम्मान का प्रतीक बताते हुए इसे राजनीतिक गुटबाजी के नजरिए से नहीं देखने की बात कही।
ईवीएम पर संदेह दूर करने के लिए बैलेट पेपर का समर्थन
चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि यदि लोगों के मन में ईवीएम से मतदान को लेकर संदेह है, तो उसे दूर करने के लिए बैलेट पेपर से चुनाव कराना अच्छा विकल्प हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ईवीएम को लेकर उठने वाले शक और शुबहों को दूर करने के लिए बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव कराने से लोगों का संदेह दूर होता है, तो इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उनके इस बयान से चुनाव प्रक्रिया और मतदान प्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
नवंबर में विधानसभा सत्र बुलाने पर विचार संभव
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा के आगामी सत्र को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष की ओर से नवंबर में सत्र आयोजित करने की बात कही गई है। यदि अध्यक्ष की तरफ से इस संबंध में प्रस्ताव आता है, तो सरकार नवंबर में विधानसभा सत्र बुलाने पर विचार कर सकती है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में आगे की प्रक्रिया प्रस्ताव मिलने के बाद तय की जाएगी।सुक्खू ने दिसंबर में प्रदेश में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने और सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि पर्यटन सीजन के दौरान सरकारी वाहनों की आवाजाही, रूट व्यवस्था और यातायात प्रतिबंधों के कारण आम लोगों को परेशानी हो सकती है। ऐसे में विधानसभा सत्र की तारीख तय करते समय इन परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।