समर न्यूज | मानसा
पंजाब में नशे से जुड़े मामलों और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पीड़ित परिवारों से मिलने का स्वागत किया, लेकिन सवाल उठाया कि नेताओं को ऐसे परिवारों की याद चुनाव नजदीक आने पर ही क्यों आती है।
वहीं, वर्ष 2019 में मारी गईं पंजाब की ड्रग लाइसेंसिंग अधिकारी नेहा शौरी के माता-पिता ने आरोप लगाया कि उन्हें अमित शाह से मिलने नहीं दिया गया। दोनों घटनाओं ने न्याय और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिवार के समर्थन में पहुंचे बलकौर सिंह ने उनके पिता भीम सिंह से गृह मंत्री के सामने गैंगस्टरों और कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाने की अपील की। उन्होंने सवाल किया कि जेलों में बंद गैंगस्टरों को सुनवाई के लिए अदालतों में पेश करने में देरी क्यों हो रही है। बालकौर सिंह ने कहा कि संवेदनशील मामलों में राजनीति करने के बजाय पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए दावा किया कि अमित शाह उनसे भी मिल चुके हैं और उन्होंने संगरूर लोकसभा उपचुनाव के दौरान उन्हें भाजपा का टिकट देने की पेशकश की थी। बालकौर सिंह ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों के बाद गृह मंत्री का परिवारों से मिलने पहुंचना स्वागतयोग्य है, लेकिन सरकारों को यह भी बताना चाहिए कि ऐसे मामलों में पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
}नेहा शौरी के माता-पिता की शिकायत: नेहा शौरी की मार्च 2019 में खरड़ स्थित कार्यालय में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह उस समय क्षेत्रीय ड्रग लाइसेंसिंग अधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। उनके माता-पिता लंबे समय से मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मानसा में अमित शाह के दौरे के दौरान उन्होंने उनसे मिलने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें झोटा के आवास में प्रवेश नहीं करने दिया। परिवार अपनी बेटी की हत्या की जांच सीबीआई से कराने की मांग दोहरा रहा है।
}न्याय की मांग पर सवाल: दोनों घटनाओं ने यह सवाल फिर खड़ा किया है कि नशे के कारोबार और उससे जुड़े अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने वाले परिवारों को न्याय दिलाने के लिए सरकारें कितनी प्रभावी कार्रवाई कर रही हैं। नेहा शौरी के माता-पिता की शिकायत पर पुलिस का पक्ष सामने आना जरूरी है। वहीं, बलकौर सिंह के सवाल राजनीतिक दलों के लिए जवाबदेही की चुनौती पेश करते हैं। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नशा और कानून-व्यवस्था बड़े राजनीतिक मुद्दे बनते जा रहे हैं। ऐसे में पीड़ित परिवारों से मुलाकातों के साथ-साथ जांच की प्रगति, दोषियों को सजा और परिवारों की शिकायतों पर कार्रवाई भी राजनीतिक दलों की विश्वसनीयता तय करेगी।