Summer express, हिसार। हरियाणा में धान खरीद में देरी, मंडियों में अव्यवस्थाओं और फसल सत्यापन में आ रही दिक्कतों को लेकर कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़ ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकार के दो साल पूरे होने पर रिपोर्ट कार्ड पेश किया है, लेकिन मंडियों में किसानों की परेशानियां अब भी कम नहीं हुई हैं।
पेटवाड़ ने कहा कि नशा खरीदने के लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं पड़ती, जबकि मंडी में अपनी फसल बेचने के लिए किसान से तीन गवाह मांगे जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि किसानों पर ऐसी शर्तें क्यों थोपी जा रही हैं। उनके अनुसार, कृषि प्रधान देश में किसानों के साथ अन्याय करके विकास नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस विधायक ने कहा कि मंडियों में धान का उठान धीमा है और मिलर्स की कमी के कारण खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। सरकार 24 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने का दावा करती है, लेकिन उसे स्पष्ट करना चाहिए कि इन फसलों की खरीद सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
पेटवाड़ ने कहा कि सरकार ने धान की खरीद 29 सितंबर से शुरू की थी, लेकिन शुरुआती दिनों में मंडियों में आढ़ती और मिलर्स खरीद नहीं कर रहे थे। उन्होंने धान में नमी की अधिकतम सीमा 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग की। उनका कहना है कि मौजूदा मानक के कारण किसानों को परेशानी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने मिलिंग की शर्त पर भी सवाल उठाए। पेटवाड़ के अनुसार, एक क्विंटल धान के बदले मिलर्स को 67 किलो चावल देना होता है, जबकि इतनी मात्रा में चावल निकालना मुश्किल है। इससे किसानों और आढ़तियों पर असर पड़ता है। उन्होंने सरकार से निर्धारित मात्रा घटाकर 58 से 59 किलो करने की मांग की, ताकि दोनों को राहत मिल सके।
पेटवाड़ ने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव के दौरान धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदने का वादा किया था। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी कई जनसभाओं में इसकी घोषणा की थी। इसके बावजूद अब 2461 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर भी खरीद नहीं हो पाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि किसानों से किया गया चुनावी वादा कब पूरा होगा।
कांग्रेस विधायक ने कहा कि प्रदेश में हजारों किसान पोर्टल पर फसल सत्यापन को लेकर परेशान हैं। उन्होंने नारनौंद के खेड़ी चौपटा गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि एक किसान ने बाजरे की बुवाई की है, लेकिन पोर्टल पर उसकी फसल नरमा दर्ज दिखाई जा रही है।
इसी तरह कापड़ो गांव के एक किसान की एक एकड़ में 97 मन धान की पैदावार हुई। पेटवाड़ के अनुसार, सरकार प्रति एकड़ 21.30 क्विंटल यानी करीब 52 मन धान की खरीद के निर्धारित मानक के आधार पर अधिक पैदावार को लेकर सवाल उठा रही है। सरकार ने ऐसे मामलों में एसडीएम और तहसीलदार से सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पेटवाड़ ने कहा कि उन्होंने विधानसभा के पिछले सत्र में भी किसानों को मुआवजा देने की मांग उठाई थी। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की भले न चले, लेकिन पोर्टल की जरूर चलती है।
कांग्रेस विधायक ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय केंद्र की ओर से गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 250 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी के साथ हरियाणा सरकार ने 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि हुड्डा सरकार के दौरान धान की कीमत 4500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंची थी।
पेटवाड़ ने कहा कि सरकार को किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ खेती की लागत पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।