Summer express, लुधियाना। धान की कटाई और थ्रेशिंग का काम तेज होने के साथ ही लुधियाना की हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। आसपास के जिलों में पराली जलाने की घटनाओं के बीच औद्योगिक नगरी की वायु गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। 26 अक्टूबर को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 126 दर्ज किया गया, जो मध्यम श्रेणी में आता है। प्रदूषण का बढ़ता स्तर बुजुर्गों, हृदय रोगियों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
पिछले एक सप्ताह के आंकड़ों पर नजर डालें तो लुधियाना में वायु गुणवत्ता सूचकांक में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 20 अक्टूबर को एक्यूआई 101, 21 अक्टूबर को 155, 22 अक्टूबर को 113, 23 अक्टूबर को 147 और 24 अक्टूबर को 169 दर्ज किया गया। इसके बाद 25 अक्टूबर को यह घटकर 92 पर आ गया, जबकि 26 अक्टूबर को फिर बढ़कर 126 पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में प्रदूषण बढ़ने से सांस लेने में परेशानी, छाती में जकड़न और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में धान की खेती के कुल 2.83 लाख हेक्टेयर रकबे में से करीब 35 प्रतिशत हिस्से में कटाई पूरी हो चुकी है। पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए प्रशासन उपग्रह के माध्यम से निगरानी कर रहा है। जगराओं क्षेत्र में उपग्रह से पराली जलाने की संभावित घटना का पता चला, जिसके बाद प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। जांच के दौरान खेत के आसपास घास-फूस जली हुई मिली। पिछले वर्ष जिले में पराली जलाने के 219 मामले सामने आए थे। प्रशासन का कहना है कि किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है और फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए सब्सिडी पर कृषि मशीनें भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
प्रदूषण का असर अस्पतालों में भी दिखाई देने लगा है। सिविल अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले आठ महीनों में क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और अस्थमा के संदिग्ध 1,355 मरीजों की जांच की गई। इनमें 941 नए मरीज सामने आए, जिनमें से 788 का उपचार जारी है, जबकि 153 मरीजों ने बीच में ही इलाज छोड़ दिया। वहीं, पिछले दो महीनों में 235 संदिग्ध मरीजों की जांच की गई, जिनमें से 192 में सीओपीडी की पुष्टि हुई।
डॉक्टरों ने सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों और बुजुर्गों को प्रदूषण के प्रति विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को सुबह और शाम के समय बाहर सैर करने से बचना चाहिए, खासकर जब हवा की गुणवत्ता खराब हो। घर से बाहर निकलते समय उपयुक्त मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए और सांस लेने में परेशानी बढ़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।