Summer express, करनाल। बेहतर भविष्य और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लेकर ऑस्ट्रेलिया गए हरियाणा के करनाल जिले के एक युवक की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। ब्याना गांव निवासी 24 वर्षीय तुषार कंबोज की न्यू साउथ वेल्स के ह्यूम हाईवे पर दो ट्रकों की भीषण टक्कर में जान चली गई। तुषार करीब चार साल पहले पढ़ाई के लिए विद्यार्थी वीजा पर ऑस्ट्रेलिया गया था। बेटे को विदेश भेजने के लिए उसके पिता ने अपनी जमीन और पशुबाड़ा तक बेच दिया था। करीब 15 लाख रुपये खर्च कर बेटे को विदेश भेजने वाले परिवार ने कभी नहीं सोचा था कि उसका सपना इस तरह अधूरा रह जाएगा।
परिजनों के अनुसार, तुषार के पिता राकेश कुमार पेशे से दर्जी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और बेटे का भविष्य संवारने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की थी। इसके लिए पशुबाड़ा बेचने के साथ कर्ज भी लेना पड़ा। करीब 15 लाख रुपये खर्च करने के बाद एक जनवरी 2022 को तुषार को पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया भेजा गया था। तुषार ने 12वीं तक शिक्षा हासिल की थी और वहां पढ़ाई के साथ ट्रक चलाने का काम भी करने लगा था।
राकेश कुमार ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब नौ बजे न्यू साउथ वेल्स के ह्यूम हाईवे पर गनिंग के पास हादसा हुआ। तुषार ट्रक चला रहा था। इसी दौरान उसका ट्रक दूसरे ट्रक से टकरा गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि तुषार की मौके पर ही मौत हो गई।
परिवार को हादसे की सूचना भारतीय समयानुसार सुबह करीब पांच बजे मिली। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। दुखद बात यह है कि हादसे से एक दिन पहले ही तुषार ने अपने घर फोन किया था। उस दौरान परिवार के सदस्यों से बातचीत हुई थी और नए मकान के निर्माण को लेकर भी चर्चा की गई थी।
परिजनों ने बताया कि तुषार ने जनवरी 2027 में भारत लौटने की बात कही थी। परिवार में उसकी शादी की चर्चा भी चल रही थी और इसी उम्मीद में घर का नया मकान बनवाया जा रहा था। पिता को विश्वास था कि बेटा विदेश में मेहनत करके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करेगा और जल्द घर लौटेगा, लेकिन हादसे ने परिवार की सारी खुशियां छीन लीं।
तुषार के परिवार में मां, छोटा भाई, दादी और चाचा हैं। बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद से घर में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अब परिवार को तुषार के पार्थिव शरीर के भारत पहुंचने का इंतजार है। पिता के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में तुषार के साथी पार्थिव शरीर को भारत भेजने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कराने में मदद कर रहे हैं। परिवार को उम्मीद है कि करीब 10 दिनों में उसका शव गांव पहुंच जाएगा।
राकेश कुमार ने सरकार से भी अपील की है कि उनके बेटे के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने में सहायता की जाए। जिस घर में बेटे की वापसी और उसकी शादी की तैयारियों को लेकर उत्साह था, वहां अब शोक का माहौल है। परिवार और गांव के लोग इस दुखद घटना से स्तब्ध हैं।