वॉशिंगटन | अमेरिका में पढ़ाई करने वाले दो भारतीय छात्रों को बुजुर्गों से करोड़ों रुपये की ठगी करने के मामलों में सजा सुनाई गई है। इन मामलों में छात्रों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर बुजुर्गों को डराने-धमकाने के बाद उनसे नकद और कीमती आभूषण ठगे। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) की रिपोर्ट के अनुसार, ये ठगी योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी गई।
किशन पटेल को 5 साल से अधिक की सजा
गुजरात से ताल्लुक रखने वाले 20 वर्षीय किशन राजेशकुमार पटेल, जो अमेरिका में छात्र वीजा पर रह रहा था, ने मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश में अपनी भूमिका कबूल की। अदालत ने उसे 63 माह (5 साल 3 महीने) की जेल की सजा सुनाई है। जांच में सामने आया कि पटेल ने कम से कम 25 वरिष्ठ नागरिकों से 26 लाख 94 हजार डॉलर (लगभग 22 करोड़ रुपये) की धोखाधड़ी की।
पटेल को 24 अगस्त 2024 को टेक्सास के ग्रेनाइट शोल्स से गिरफ्तार किया गया था और 29 अगस्त से वह संघीय हिरासत में है।
सह-आरोपी ने भी कुबूला अपराध
इस मामले में पटेल के साथ नामजद एक और भारतीय नागरिक, ध्रुव राजेशभाई मंगुकिया ने भी 16 जून को अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। हालांकि, उसकी सजा का ऐलान अभी बाकी है।
एक अन्य छात्र को 8 साल की सजा
इससे अलग लेकिन मिलते-जुलते मामले में, एक अन्य भारतीय छात्र मोइनुद्दीन मोहम्मद को इस साल की शुरुआत में अमेरिकी बुजुर्गों को ठगने के आरोप में आठ साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। उस पर लगभग 60 लाख डॉलर (करीब 50 करोड़ रुपये) की धोखाधड़ी का आरोप है।
वरिष्ठ नागरिकों को बनाते थे निशाना
न्याय विभाग ने बताया कि आरोपी खुद को अमेरिकी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन कॉल्स करते थे और बुजुर्गों को यह कहकर डराते थे कि उनके खिलाफ कोई गंभीर मामला दर्ज है। फिर उनसे नकद पैसे या गहनों की मांग की जाती थी, जिसे बाद में वे अपने संपर्कों के जरिए एकत्रित करते थे।