नई दिल्ली | म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय अक्सर निवेशक यह मानते हैं कि अलग-अलग स्कीम में पैसा लगाने से उनका पोर्टफोलियो सुरक्षित और विविध हो जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह सोच हर बार सही साबित नहीं होती। यदि आपने जिन फंड्स में निवेश किया है, उनमें एक जैसे स्टॉक्स शामिल हैं, तो यह रणनीति नुकसानदेह साबित हो सकती है। इसे म्यूचुअल फंड ओवरलैप कहा जाता है।
क्या होता है म्यूचुअल फंड ओवरलैप?
जब दो या अधिक फंड्स में एक जैसी कंपनियों के स्टॉक्स, बॉन्ड्स या अन्य सिक्योरिटीज शामिल होती हैं, तो उसे ओवरलैप की स्थिति कहते हैं। इसका अर्थ है कि आप सोच रहे हैं कि आपने विविधता ला दी है, जबकि असल में आप बार-बार एक ही निवेश को दोहरा रहे होते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि दो लार्ज कैप फंड्स में TCS और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे शेयर मौजूद हैं, तो आपका पैसा एक ही जगह दो बार लग रहा है।
ओवरलैप क्यों है खतरनाक?
Moneyfront के को-फाउंडर और CEO मोहित गांग कहते हैं कि यदि कोई एक शेयर गिरता है जो कई फंड्स में कॉमन है, तो आपके पूरे पोर्टफोलियो की वैल्यू एक साथ नीचे आ सकती है। इससे जोखिम का स्तर बढ़ जाता है, भले ही आपको लगता हो कि आपने जोखिम को विभाजित कर लिया है। साथ ही, हर फंड पर अलग-अलग चार्ज लगने के कारण आपके निवेश पर अतिरिक्त लागत भी आती है।
कैसे पहचानें ओवरलैप?
Optima Money के फाउंडर और एमडी पंकज मठवाल का कहना है कि किसी भी म्यूचुअल फंड की टॉप होल्डिंग्स की जांच करें। यदि दो फंड्स की 30-40% होल्डिंग्स एक जैसी हैं, तो यह ओवरलैप का संकेत है। इस तरह आप जान सकते हैं कि कहीं आप अनजाने में एक ही कंपनी में बार-बार तो निवेश नहीं कर रहे।
कैसे बचें ओवरलैप से?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एक जैसे निवेश से बचने के लिए विभिन्न निवेश रणनीतियों वाले फंड्स चुनें। मसलन, यदि आपने लार्ज कैप फंड में पैसा लगाया है तो साथ में मिड कैप या स्मॉल कैप फंड को शामिल करें। Flexi Cap या Multi Cap फंड्स भी एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं, क्योंकि ये खुद ही विभिन्न आकार की कंपनियों में निवेश करते हैं।
इसके अलावा, अपने पोर्टफोलियो की समय-समय पर समीक्षा करना जरूरी है। यदि ओवरलैप की स्थिति नजर आए तो तत्काल बदलाव करें ताकि आपका निवेश संतुलित और सुरक्षित बना रहे।