19 June, 2025
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में 20 जून से शुरू होने जा रहा अंतरराष्ट्रीय शूलिनी मेला न सिर्फ एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा और ऐतिहासिक विरासत का जीवंत प्रतीक भी है। यह मेला मां शूलिनी देवी को समर्पित है, जो सोलन नगर की अधिष्ठात्री देवी हैं। माना जाता है कि सोलन का नाम भी मां शूलिनी के नाम पर ही रखा गया है।
शूलिनी मेले का इतिहास लगभग 150 से 200 वर्ष पुराना माना जाता है। कहा जाता है कि यह आयोजन मूलतः मां शूलिनी की वार्षिक यात्रा और नगर भ्रमण के रूप में आरंभ हुआ था, जिसमें देवी की पालकी नगरवासियों द्वारा श्रद्धा और भक्ति के साथ मुख्य मंदिर से शहर के विभिन्न हिस्सों तक ले जाई जाती थी। धीरे-धीरे यह धार्मिक यात्रा एक विशाल मेले में परिवर्तित हो गई, जिसमें हर वर्ष लाखों श्रद्धालु और पर्यटक भाग लेने लगे।
आज शूलिनी मेला न केवल धार्मिक भावना का केंद्र है, बल्कि यह सोलन की सांस्कृतिक, सामाजिक और व्यापारिक पहचान भी बन चुका है। मेले में पारंपरिक झांकियों, लोक संगीत, नृत्य प्रस्तुतियों, खेल प्रतियोगिताओं और प्रदर्शनी स्टॉल्स का आयोजन होता है, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।
इस वर्ष भी तीन दिवसीय यह मेला पूरे जोश और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और सुविधाओं की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। सोलन शहर इन दिनों रोशनी और सजावट से जगमगा रहा है, और श्रद्धालु मां शूलिनी के स्वागत के लिए बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।