तेहरान | अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद ईरान की संसद ने बड़ा कदम उठाते हुए रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की मंजूरी दे दी है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, यह प्रस्ताव अब सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया है।
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्य मेजर जनरल कोवसारी ने बताया कि यह कदम अमेरिका के आक्रामक रुख के जवाब में उठाया गया है और देश की सुरक्षा प्राथमिकताओं के तहत जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
क्या है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट एक संकरा जलमार्ग है जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसके एक ओर ईरान है, तो दूसरी ओर ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)। इसकी लंबाई लगभग 167 किलोमीटर और सबसे संकरा हिस्सा सिर्फ 33 किलोमीटर चौड़ा है।
यह मार्ग दुनिया के लिए ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ की हड्डी माना जाता है।
क्यों है यह इतना महत्वपूर्ण?
- दुनिया के लगभग 20-30% कच्चे तेल और 1/3 LPG की सप्लाई इसी रास्ते से होती है।
- ओपेक देशों – सऊदी अरब, ईरान, कुवैत, इराक और UAE – के लिए यह मुख्य निर्यात मार्ग है।
- यदि यह रास्ता अवरुद्ध होता है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
होर्मुज के बंद होने पर संभावित प्रभाव
| प्रभाव क्षेत्र | संभावित परिणाम |
| वैश्विक तेल आपूर्ति | कमी, तेल की कीमतों में तेजी |
| भारत पर असर | आयात महंगा होगा, महंगाई का खतरा |
| अंतरराष्ट्रीय व्यापार | अस्थिरता बढ़ेगी, आर्थिक झटके संभव |
| सैन्य तनाव | खाड़ी क्षेत्र में तनाव और टकराव की आशंका |
| अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया | UN, NATO और पश्चिमी देशों की कड़ी प्रतिक्रिया |
भारत की स्थिति
भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है, होर्मुज स्ट्रेट पर काफी हद तक निर्भर है। हालांकि भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आश्वस्त किया है कि देश ने वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की योजना पहले से बना रखी है और फिलहाल कई हफ्तों का पर्याप्त तेल और गैस स्टॉक उपलब्ध है।
क्या है विकल्प?
- यूएई और सऊदी अरब जैसे देश होर्मुज को बायपास करने के लिए पाइपलाइन नेटवर्क तैयार कर चुके हैं।
- अमेरिका के अनुसार, इन देशों के पास करीब 2.6 मिलियन बैरल/दिन की पाइपलाइन क्षमता है जो होर्मुज पर निर्भर नहीं है।
क्या ईरान कानूनी रूप से होर्मुज बंद कर सकता है?
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत ईरान को जलमार्ग पूरी तरह बंद करने का अधिकार नहीं है। अगर ईरान ऐसा करता है तो उसे अमेरिका और उसके सहयोगियों की नौसेना का सामना करना पड़ सकता है।
साथ ही, ईरान के अपने तेल निर्यात भी इस मार्ग पर निर्भर हैं, जिससे यह कदम उसके लिए भी आर्थिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है।