24 June, 2025
हरे-भरे पहाड़ों के बीच स्थित जाखू मंदिर न केवल शिमला की सबसे ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, बल्कि यह श्रद्धा, इतिहास और पौराणिक गाथाओं से भी ओत-प्रोत है। यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है और मान्यता है कि रामायण काल में संजीवनी बूटी की खोज के दौरान हनुमान जी यहां कुछ समय के लिए रुके थे।
मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को घने देवदार के जंगलों से होते हुए लगभग 2.5 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। यहां तक पहुंचने के लिए रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे पर्यटक प्रकृति की गोद में यात्रा का आनंद लेते हुए मंदिर तक पहुंच सकते हैं।
हनुमान जी की 108 फीट ऊँची प्रतिमा
जाखू मंदिर की विशेषता यहां स्थित 108 फीट ऊँची भगवान हनुमान की प्रतिमा है, जो पूरे शिमला शहर से दिखाई देती है। यह प्रतिमा देश की सबसे ऊँची हनुमान प्रतिमाओं में से एक है और यह भक्तों के लिए आस्था और ऊर्जा का केंद्र बनी हुई है।
बंदरों का बसेरा
जाखू मंदिर के परिसर में बड़ी संख्या में बंदर पाए जाते हैं, जो यहां की एक अनोखी पहचान बन गए हैं। इन बंदरों को लेकर एक मान्यता भी जुड़ी है कि वे हनुमान जी के सेवक हैं और इस स्थान की रक्षा करते हैं। हालांकि, पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे सावधानी से चलें और खाने-पीने की वस्तुएं खुले में न रखें।
धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण
हर वर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहां दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि और हनुमान जयंती के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और भव्य मेले का आयोजन होता है।
जाखू मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह प्रकृति, अध्यात्म और संस्कृति का संगम भी है। अगर आप शिमला जाएं, तो जाखू मंदिर की यात्रा अवश्य करें – यह अनुभव आपको जीवन भर याद रहेगा।