मुंबई | भारतीय शेयर बाजार ने बीते तीन महीनों में जबरदस्त तेजी दिखाई है, जिसमें सेंसेक्स ने 12,000 अंकों की बढ़त दर्ज की है। इस रफ्तार से बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹461 लाख करोड़ पहुंच गया, जो कि करीब ₹72 लाख करोड़ की बढ़ोतरी दर्शाता है। हालांकि यह तेजी निवेशकों के लिए लाभकारी रही, लेकिन अब यह रैली मूल्यांकन और आधारभूत आंकड़ों (Valuation vs Fundamentals) के बीच असंतुलन की वजह से चिंता का विषय बन रही है।
लिक्विडिटी ने दिया बाजार को बूस्ट
विशेषज्ञों के अनुसार, यह रैली मुख्य रूप से बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी (liquidity) के कारण है:
- घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने तीन महीनों में ₹3.5 लाख करोड़ से अधिक की खरीदारी की।
- विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भी लगातार भारतीय बाजार में निवेश जारी रखा।
- म्यूचुअल फंड्स के पास अकेले मई में ₹2.17 लाख करोड़ की नकदी उपलब्ध रही।
- मासिक SIP फ्लो ₹26,000 करोड़ से ऊपर बना हुआ है।
JM फाइनेंशियल के वेंकटेश बालासुब्रमण्यम ने कहा,
“यह तेजी पूरी तरह से लिक्विडिटी-ड्रिवन है, जिसमें मूल्यांकन से ज्यादा कैश फ्लो की भूमिका रही।”
वैल्यूएशन और फंडामेंटल्स में बढ़ती दूरी
तेजी के इस दौर में अधिकांश लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियां अपने औसत वैल्यूएशन से ऊपर ट्रेड कर रही हैं। कोटक AMC के एमडी नीलेश शाह का मानना है कि:
“पिछले 5 साल जैसा रिटर्न आने वाले वर्षों में दोहराया जाना मुश्किल है। मार्केट अब या तो फेयर वैल्यू पर है या थोड़ा ओवरवैल्यूड।”
उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि सिर्फ इक्विटी में ही नहीं, बल्कि REITs, InvITs, डेट म्यूचुअल फंड्स, गोल्ड और ETFs जैसे विकल्पों में भी निवेश करके पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करें।
कहां दिख रहा है निवेश का अवसर?
RBI द्वारा ब्याज दरों और CRR में हालिया कटौती ने बाजार में तरलता बढ़ाई है, जिससे खासतौर पर फाइनेंशियल सेक्टर को लाभ हुआ है।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंशिंग कंपनियां जैसे PFC और REC निवेश के लिए आकर्षक बनी हैं।
- PSU बैंक इंडेक्स छह महीने के उच्चतम स्तर पर है।
Quantace Research के कार्तिक जॉनगडला के मुताबिक,
“नीतिगत समर्थन और तरलता के कारण वित्तीय संस्थानों में आगे भी मजबूती दिख सकती है।”
आगे क्या? सतर्क रहने की जरूरत
आने वाले दिनों में कुछ बड़े इवेंट्स निवेशकों की रणनीति पर असर डाल सकते हैं:
- 9 जुलाई की टैरिफ डेडलाइन और Q1 रिजल्ट सीजन बाजार को झटका दे सकते हैं।
- आईटी सेक्टर, जो अब तक सुस्त था, अब आकर्षक डिविडेंड यील्ड (2–2.5%) और संतुलित वैल्यूएशन की वजह से ध्यान खींच रहा है।
- केमिकल सेक्टर में दो साल की गिरावट के बाद स्थिरता और संभावित रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं।
- फार्मा और केमिकल जैसे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर पर अमेरिकी टैरिफ का खतरा बना हुआ है।
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