बीजिंग | चीन ने सोमवार को कहा कि भारत के साथ सीमा से जुड़ा विवाद बेहद जटिल है और इसका हल तत्काल नहीं निकलेगा। हालांकि, उसने यह भी स्पष्ट किया कि वह सीमा निर्धारण और शांति बनाए रखने को लेकर संवाद के लिए प्रतिबद्ध है।
यह प्रतिक्रिया उस वक्त आई है जब भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में चीन के रक्षा मंत्री दोंग जून से मुलाकात में सीमाओं पर तनाव घटाने और बातचीत की प्रक्रिया को फिर से सक्रिय करने का प्रस्ताव दिया था। दोनों नेताओं की यह बातचीत चिंगदाओ में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के इतर हुई थी, जहां सीमा पर स्थिरता बनाए रखने को लेकर चर्चा हुई।
“सीमा मुद्दे को लेकर भारत से बना हुआ है संवाद” : चीन
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग से जब भारत की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा,
“भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधियों की एक व्यवस्था पहले से ही मौजूद है। दोनों देश राजनीतिक दिशानिर्देशों और मापदंडों पर सहमत हैं और विभिन्न स्तरों पर सैन्य और कूटनीतिक चैनल खुले हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि चीन सीमा निर्धारण और प्रबंधन, शांति बनाए रखने और सीमा क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने को लेकर भारत के साथ संवाद को तैयार है।
“समाधान में वक्त लगेगा, लेकिन दोनों देश संपर्क में हैं”
सीमा समाधान में देरी को लेकर पूछे गए सवाल पर माओ निंग ने कहा,
“यह एक जटिल मुद्दा है, और इसे सुलझाने में समय लगेगा। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत और चीन के बीच संवाद के कई प्लेटफॉर्म हैं और हम उम्मीद करते हैं कि दोनों पक्ष संपर्क बनाए रखेंगे।”
बता दें कि सीमा से जुड़े मसलों पर 23वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता पिछले साल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई थी। 2020 की झड़प के बाद यह पहली बार था जब इतने उच्च स्तर पर संवाद हुआ।
भारत ने भी जताई गंभीरता, “भरोसे की कमी दूर हो”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन से साफ तौर पर कहा है कि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद पैदा हुए विश्वास संकट को खत्म करने के लिए जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में तनाव घटाकर “सौहार्दपूर्ण पड़ोसी संबंधों” को मजबूत करने पर जोर दिया।
गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच पिछले वर्ष अक्टूबर में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से सैनिकों की वापसी को लेकर सहमति बनी थी। उसी कड़ी में यह ताजा बातचीत दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।