वॉशिंगटन | अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा ऐलान किया है कि इज़राइल गाज़ा में 60 दिनों के युद्धविराम के एक अहम प्रस्ताव पर सहमत हो गया है। इस प्रस्ताव को अब मिस्र और कतर की मध्यस्थता में हमास के सामने रखा जाएगा।
ट्रंप ने क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी देते हुए कहा, “मेरी टीम ने इज़राइली नेतृत्व के साथ गंभीर और विस्तृत बातचीत की है। इसके बाद इज़राइल ने उस प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है जिसमें शांति स्थापित करने की ज़रूरी शर्तें शामिल हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “अब सब कुछ हमास के फैसले पर निर्भर है। यह क्षेत्र के लिए एक दुर्लभ अवसर है – अगर चूका, तो हालात और बदतर होंगे।”
ट्रंप के मुताबिक, प्रस्ताव में बंधकों की रिहाई, मानवीय सहायता और संघर्षविराम के दौरान स्थायी समाधान की दिशा में वार्ता शामिल है।
प्रस्ताव में क्या शामिल है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्धविराम प्रस्ताव के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- हमास 10 जीवित बंधकों और 18 मृत बंधकों के शव लौटाएगा।
- इज़राइल 125 आजीवन कारावास भुगत रहे कैदियों और 1,111 अन्य कैदियों को रिहा करेगा, साथ ही 180 फिलिस्तीनी शवों को लौटाएगा।
- 60 दिन का पूर्ण युद्धविराम, जिसमें संयुक्त राष्ट्र या रेड क्रिसेंट की निगरानी में मानवीय सहायता तुरंत शुरू की जाएगी।
- स्थायी संघर्ष विराम को लेकर बातचीत, जो इस अवधि के दौरान जारी रहेगी।
हमास की प्रतिक्रिया क्या है?
हमास ने फिलहाल प्रस्ताव को “सकारात्मक संकेत” बताया है, लेकिन उनके प्रवक्ता ने कहा कि वे अभी इसकी शर्तों की गहराई से समीक्षा कर रहे हैं। हमास की प्रमुख मांग यह है कि इज़राइली सेना गाज़ा से पूरी तरह पीछे हटे और एक स्थायी संघर्षविराम की गारंटी दी जाए।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन
मिस्र और कतर की सरकारें इस प्रस्ताव को “शांति की दिशा में एक मजबूत शुरुआत” बता रही हैं। वहीं अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे देशों ने भी इस पहल का स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी स्थायी समाधान के बिना यह अस्थायी राहत ही मानी जाएगी।
आगे क्या होगा?
यह प्रस्ताव अब हमास की स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रहा है। संभावना है कि इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू 7 जुलाई को वॉशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे, जहां इस प्रस्ताव की अंतिम रूपरेखा तय की जा सकती है।
गौरतलब है कि यह प्रस्ताव जनवरी से मार्च के बीच लागू अस्थायी युद्धविराम से कहीं अधिक संगठित और ठोस प्रयास माना जा रहा है।