नई दिल्ली | 13 दिसंबर 2023 को संसद भवन में हुए सुरक्षा उल्लंघन के मामले में आरोपी नीलम आज़ाद और महेश कुमावत को दिल्ली हाईकोर्ट से बुधवार को जमानत मिल गई। हालांकि कोर्ट ने इस राहत के साथ कई सख्त शर्तें भी लगाई हैं, जिनका पालन करना दोनों आरोपियों के लिए अनिवार्य होगा।
जमानत का आदेश न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने सुनाया। यह फैसला 21 मई को सुरक्षित रखा गया था। कोर्ट ने दोनों को ₹50,000 के जमानती बॉन्ड और इतनी ही राशि के दो ज़मानतदार पेश करने का निर्देश दिया है।
क्या हैं जमानत की शर्तें?
- घटना पर सार्वजनिक टिप्पणी प्रतिबंधित:
अदालत ने साफ निर्देश दिया है कि आरोपी न तो इस घटना पर कोई इंटरव्यू देंगे और न ही सोशल मीडिया या किसी अन्य मंच पर कोई बयान देंगे। - दिल्ली नहीं छोड़ सकते:
जमानत पर रिहा होने के बावजूद दोनों आरोपी दिल्ली की सीमाओं से बाहर नहीं जा सकेंगे। - हफ्ते में तीन दिन पुलिस स्टेशन में हाज़िरी:
उन्हें हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार सुबह 10 बजे संबंधित पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा।
क्या हुआ था संसद में?
13 दिसंबर 2023 को संसद की सुरक्षा उस वक्त चौंक गई जब छह लोगों के एक समूह ने सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए संसद भवन में घुसपैठ की। दो आरोपी—सागर शर्मा और मनोरंजन डी—लोकसभा कक्ष तक पहुंच गए थे। शून्यकाल के दौरान उन्होंने दर्शक दीर्घा से छलांग लगाई और पीले धुएं वाले कनस्तर छोड़े। उन्होंने जमकर नारेबाज़ी भी की थी, जिसके बाद उन्हें सांसदों और सुरक्षा कर्मियों ने पकड़ लिया।
जांच में क्या सामने आया?
जांच के अनुसार, सभी आरोपी ‘भगत सिंह फैन क्लब’ नाम के एक सोशल मीडिया ग्रुप से जुड़े थे। इनका आपसी संपर्क ‘सिग्नल’ ऐप के ज़रिए होता था, जिससे इन्होंने पूरी योजना को गोपनीय रखा। बताया गया कि ये लोग मैसूर में मिले थे और करीब डेढ़ साल से इस योजना पर काम कर रहे थे।
क्यों संवेदनशील थी यह तारीख?
यह घटना संसद पर 2001 में हुए आतंकी हमले की बरसी पर हुई थी। उस हमले में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने संसद पर धावा बोला था, जिसमें सुरक्षा बलों के कई जवान शहीद हुए थे। ऐ