नई दिल्ली | संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त 2025 तक आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में संसदीय कार्य मंत्रालय की ओर से अधिसूचना जारी की गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए लोकसभा और राज्यसभा की बैठक बुलाने की अनुमति दे दी है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि सत्र के दौरान 13 और 14 अगस्त को बैठक नहीं होगी, ताकि स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा प्रबंध किए जा सकें।
क्यों अहम है यह सत्र?
इस बार का मानसून सत्र “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद संसद की पहली बैठक होगी। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने PoK और पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। सरकार की इस जवाबी कार्रवाई को अब तक के सबसे सटीक सैन्य अभियानों में गिना जा रहा है।
विपक्ष ने की थी विशेष सत्र की मांग
इस ऑपरेशन को लेकर विपक्षी गठबंधन INDIA के 16 दलों ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी। विपक्ष का कहना था कि संसद में इस सैन्य कार्रवाई की रणनीति, उद्देश्य और दीर्घकालिक प्रभावों पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। हालांकि सरकार ने विशेष सत्र से इनकार करते हुए कहा कि मानसून सत्र में ही इन विषयों पर चर्चा का पूरा मौका मिलेगा।
संभावित विधायी एजेंडा
जानकारों का मानना है कि इस मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार कुछ अहम विधेयकों को सदन में पेश कर सकती है। इन विधेयकों में मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, डिजिटल मीडिया और न्यायिक सुधार से जुड़े कानून शामिल हो सकते हैं।
बजट सत्र के बाद पहला बड़ा सत्र
इस साल संसद का बजट सत्र 31 जनवरी को शुरू हुआ था, जो 4 अप्रैल को स्थगित कर दिया गया। तब से अब तक यह वर्ष का पहला और एकमात्र पूर्ण सत्र रहा है। ऐसे में मानसून सत्र को लेकर सभी राजनीतिक दलों और जनता की निगाहें टिकी हुई हैं।