नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए Tough Location Allowance (TLA) सहित कई भत्तों में 25% की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह वृद्धि 1 जनवरी 2024 से प्रभावी मानी जाएगी, क्योंकि उसी दिन से महंगाई भत्ता (DA) 50% के स्तर को पार कर गया था। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को एक साल से अधिक का एरियर मिलने की संभावना है।
इस फैसले की पुष्टि वित्त मंत्रालय की 2 जुलाई 2025 की अधिसूचना से हुई है। हालांकि यह राहत फिलहाल केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिली है, जबकि राज्य सरकारों के कर्मियों को अब भी इस बढ़ोतरी का इंतजार है। इससे कई राज्यों में नाराजगी और असंतोष का माहौल देखा जा रहा है।
राज्य सरकारों का रुख: कोई आगे तो कोई पीछे
अरुणाचल प्रदेश पहला ऐसा राज्य है जिसने केंद्र की तर्ज पर TLA वृद्धि को स्वीकार करते हुए 2 अगस्त 2024 से इसे लागू कर दिया। लेकिन अधिकांश राज्य अब तक निर्णय नहीं ले पाए हैं या फिर किसी अधिसूचना की घोषणा नहीं की गई है।
राज्यवार TLA की वर्तमान स्थिति (2025):
- उत्तर प्रदेश: जुलाई 2025 में लागू, कठिन इलाकों में तैनात कर्मियों को ₹6,625 प्रति माह TLA-I मिलेगा।
- महाराष्ट्र, केरल, आंध्र प्रदेश: आदिवासी, दुर्गम और ठंडे इलाकों के लिए ₹6,625 की नई दर लागू।
- बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड, ओडिशा: यहां ₹5,125 प्रति माह की TLA दर तय की गई है।
- उत्तराखंड: घोषणा की उम्मीद है, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ।
- तमिलनाडु, पंजाब, गुजरात, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल: TLA में वृद्धि को लेकर अब तक कोई घोषणा नहीं।
इन राज्यों में कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है, जो केंद्र के बराबर सुविधाएं चाहते हैं।
उत्तराखंड और केरल: स्थिति अब भी असमंजस में
- उत्तराखंड: हिमालयी क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को राहत की आस, लेकिन कोई आधिकारिक निर्णय अब तक नहीं।
- केरल: राज्य सरकार ने कुछ अन्य भत्तों में संशोधन किया है, लेकिन TLA पर चुप्पी बनी हुई है।
क्या सभी राज्य सरकारें बढ़ाएंगी TLA?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बाकी राज्य सरकारें भी Tough Location Allowance में बढ़ोतरी करेंगी? हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, असम जैसे इलाकों के कर्मचारी समान भत्ते की मांग कर रहे हैं, क्योंकि वहां भी कार्य परिस्थितियां बेहद कठिन हैं।
हालांकि कई राज्य वित्तीय दबाव और आगामी चुनावों के चलते फैसला लेने से कतरा रहे हैं। कुछ सरकारें इस मुद्दे को 2026 के विधानसभा चुनावों से जोड़ रही हैं और भत्ते बढ़ाने का फैसला रणनीतिक रूप से टाल रही हैं।