चरखी दादरी | किसानों के हक पर डाका डालने के आरोप में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने बीमा कंपनी और सरकार के खिलाफ बाढ़ड़ा में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। आरोप है कि फसल बीमा के नाम पर 150 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है, और किसान आज भी मुआवजे की आस में भटक रहे हैं।
भाकियू युवा प्रदेशाध्यक्ष रवि आजाद की अगुवाई में हुए धरने में किसानों ने सरकार पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि अगर उनकी 5 सूत्रीय मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो 24 जुलाई को मुख्यमंत्री के दादरी दौरे पर ज़ोरदार विरोध किया जाएगा।
क्या हैं किसानों की मुख्य मांगें?
किसानों की मांगों में मुख्य रूप से:
- फसल बीमा की बकाया क्लेम राशि का भुगतान
- जिम्मेदार बीमा कंपनी पर कार्रवाई
- किसानों के साथ हो रहे भेदभाव की जांच
- बाढ़ड़ा विधायक की निष्क्रियता पर सवाल
- स्थायी समाधान के लिए नीति निर्धारण
धरने में भाकियू जिलाध्यक्ष हरपाल भांडवा समेत कई सामाजिक और किसान संगठनों ने हिस्सा लिया। किसानों का कहना है कि उन्होंने प्रीमियम समय पर भरा, लेकिन फसल खराब होने के बावजूद बीमा क्लेम नहीं मिला।
रवि आजाद ने सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि बीमा कंपनियों को सत्ता की शह मिली हुई है, और इसी कारण किसानों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
आर-पार की लड़ाई का ऐलान
भाकियू ने साफ कर दिया है कि अब ये सिर्फ आंदोलन नहीं, आर-पार की लड़ाई है। सरकार को या तो किसानों के साथ खड़ा होना होगा या फिर विरोध झेलने को तैयार रहना होगा।