मुरादनगर | उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा नाम और मुरादनगर की आवाज़ कहे जाने वाले राजपाल त्यागी का शनिवार सुबह 78 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे त्यागी ने अपने पैतृक गांव में अंतिम सांस ली। उनके जाने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में गहरा शून्य पैदा हो गया है।
5 दशकों की राजनीतिक विरासत का अंत
राजपाल त्यागी का सियासी सफर 1970 के दशक में कांग्रेस से शुरू हुआ। वे बाद में समाजवादी पार्टी (SP) और अन्य दलों के साथ भी जुड़े। कुल 6 बार विधायक चुने गए और कैबिनेट मंत्री के तौर पर भी उन्होंने प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका निभाई। एक बार उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीतकर सभी को चौंका दिया था। जनता से उनकी गहरी जुड़ाव ने उन्हें एक विश्वसनीय जनप्रतिनिधि बना दिया था।
मुरादनगर की राजनीति में खास पहचान
त्यागी का अधिकतर राजनीतिक जीवन गाजियाबाद की मुरादनगर सीट से जुड़ा रहा। क्षेत्र के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और हर वर्ग के साथ संवाद ने उन्हें एक जमीनी नेता के रूप में स्थापित किया। आम लोगों के बीच उनकी छवि एक सुलझे हुए और सुलभ नेता की थी।
सियासी विरासत संभाल रहे बेटे
राजपाल त्यागी की राजनीतिक विरासत अब उनके बेटे अजीत पाल त्यागी संभाल रहे हैं, जो वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से मुरादनगर के विधायक हैं। परिवार की राजनीति में मजबूत पकड़ रही है, हालांकि कुछ वर्षों में भीतरी विवाद भी चर्चा में रहे।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
राजपाल त्यागी का अंतिम संस्कार उनके गांव में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। निधन की खबर सुनते ही बड़ी संख्या में राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता, स्थानीय नेता और समर्थक उनके आवास पर पहुंचने लगे हैं।