कोच्चि | कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान हाई स्कूल के छात्र के सवाल पर थरूर ने साफ कहा कि उनकी वफ़ादारी पहले देश के प्रति है, फिर पार्टी के प्रति। इस बयान ने कांग्रेस के भीतर चल रही असहमतियों को खुलकर सामने ला दिया है।
राजनीति नहीं, देश सर्वोपरि: थरूर
थरूर ने कहा कि देशहित में सभी दलों को एकजुट होना चाहिए, चाहे उनके विचार अलग हों। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि “राष्ट्र सर्वोपरि है, पार्टी सिर्फ एक माध्यम है।” जवाहरलाल नेहरू का हवाला देते हुए थरूर बोले, “अगर भारत मर गया तो कौन बचेगा?” यह बयान उनके स्पष्ट रुख को दर्शाता है कि वे किसी भी राजनीतिक विचारधारा से ऊपर देश की भलाई को रखते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर पर पार्टी में मतभेद
थरूर का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर कांग्रेस में आंतरिक मतभेद उभरे। जहां थरूर ने सरकार की कार्रवाई का समर्थन किया, वहीं कुछ कांग्रेस नेताओं ने विरोध जताया। इससे पार्टी में अंदरूनी खींचतान और बढ़ गई।
खड़गे का तंज, थरूर का पलटवार
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने थरूर पर तंज कसते हुए कहा कि “कांग्रेस के लिए देश पहले है, लेकिन कुछ लोग मोदी को पहले रखते हैं।” यह टिप्पणी दरअसल प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा पर आधारित थी, जो थरूर ने हाल ही में की थी। जवाब में थरूर ने सोशल मीडिया पर लिखा, “उड़ने की इजाज़त मत मांगो, पंख तुम्हारे हैं और आसमान किसी का नहीं।” इस संदेश के जरिए उन्होंने अपनी स्वतंत्र सोच और विचारों पर अडिग रहने का इशारा दिया।
राजनीति से ऊपर राष्ट्रहित की बात
थरूर का यह बयान न सिर्फ कांग्रेस बल्कि तमाम राजनीतिक दलों के लिए एक संदेश माना जा रहा है – कि जब देश संकट में हो, तो दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करना चाहिए। संसद में 46 राजनीतिक दलों की मौजूदगी के बावजूद कुछ मुद्दों पर एकता जरूरी है।