24 July, 2025
हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पूरे देश में हरियाली तीज का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह विशेष दिन सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वे अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने की कामना से इस दिन उपवास करती हैं।
इस पावन अवसर पर मां पार्वती और भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। स्त्रियां सोलह श्रृंगार करती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजन करती हैं। झूले, लोकगीत और हरे परिधान इस त्योहार को और भी रंगीन बना देते हैं।
इस वर्ष हरियाली तीज की तिथि को लेकर थोड़ी उलझन देखी जा रही है, क्योंकि श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि दो दिनों में पड़ रही है। ऐसे में श्रद्धालुओं के बीच यह सवाल बना हुआ है कि व्रत किस दिन रखें। पंचांग के अनुसार, पूजन और व्रत का श्रेष्ठ समय तब होता है जब तृतीया तिथि और प्रदोष काल का संयोग एक ही दिन में हो।
धार्मिक दृष्टि से हरियाली तीज का पर्व शिव-पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन देवी पार्वती ने तपस्या से शिव जी को पति रूप में प्राप्त किया था। इस कारण यह दिन विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
ऐसे में श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे सही तिथि की पुष्टि स्थानीय पंचांग या विशेषज्ञ ज्योतिषाचार्य से अवश्य करें, ताकि पूजा और व्रत का पुण्य संपूर्ण रूप से प्राप्त हो सके।